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सुविधाओं के मामले में बेहतर कौन?

Wed, 07 Jan 2015 04:10 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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हंसा रिसर्च के सर्वे में ये जानने का भी प्रयास किया गया कि इलाज की गुणवत्ता और सुविधाओं के स्तर पर निजी अस्पताल बेहतर हैं या सरकारी? सर्वे में दोनों तरह के अस्पतालों में जाने वाले लोगों से बात की गई।
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निजी अस्पतालों में जाने वाले 82 फीसदी ने वहां उपलब्ध इलाज को बेहतर बताया, तो सरकारी अस्पतालों में जाने वाले सिर्फ 55 फीसदी की ऐसी राय थी।

सर्वे में पाया गया कि सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता संतोषजनक है। 75 फीसदी प्रतिभागी निजी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता से संतुष्ट हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह प्रतिशत महज 48 ही है। सर्वे का मानना है कि निजी अस्पतालों में सरकारी अस्पतालों की तुलना में बिस्तरों की संख्या भी पर्याप्त है।

76 फीसदी प्रतिभागी मानते हैं कि निजी अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या पर्याप्त है, जबकि 51 फीसदी सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या से संतुष्ट हैं।
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सरकारी अस्पतालों में जाने वाले 53 फीसदी ने मरीजों के प्रति डॉक्टरों और नर्सों के व्यवहार को अच्छा बताया, जबकि निजी अस्पताल में जाने वाले 78 फीसदी मरीज डॉक्टरों और नर्सों के व्यवहार से खुश हैं।

सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले 56 फीसदी मरीज डॉक्टरों और नर्सों को काबिल मानते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में जाने वाले 78 फीसदी मरीजों की ऐसी राय उभरकर आई। चिकित्सकीय उपकरणों, पेय जल स्वच्छता और टॉयलेट्स के मामले में भी निजी अस्पताल सरकारी अस्पतालों से बेहतर दिखाई देते हैं।
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