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टॉप इंस्टीट्यशंस में होगा एलयू का नाम

Tue, 30 Jul 2013 07:32 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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डॉ. एसबी निमसे
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कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय

दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में देश का एक भी विश्वविद्यालय शामिल नहीं है। मैं चाहता हूं कि लखनऊ यूनिवर्सिटी का नाम इस सूची में शुमार हो।

यह काम कठिन है, लेकिन इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। छात्रों और शिक्षकों के बीच दूरियां कम की जा रही हैं। वहीं, अगले सत्र से एग्जाम पैटर्न में भी बदलाव की तैयारी है।

इसमें निगेटिव मार्किंग के साथ इंटर्नल असेसमेंट को भी शामिल किया जाएगा। इससे छात्रों में क्लास में उपस्थित रहने और खुद को बेहतर साबित करने की होड़ होगी और रिजल्ट बेहतर होगा।
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मैं चाहता हूं कि छात्र बिना किसी दबाव और सख्ती के क्लास में रोजाना आएं। अगर उन्हें किसी तरह की शिकायत है तो वे सीधे मुझसे आकर बात करें।

अगर हम पूरे मन से प्रयास करेंगे तो पांच साल बाद संसार के इन शीर्ष 200 यूनिवर्सिटी में लखनऊ विश्वविद्यालय का नाम भी शामिल हो सकता है।

ग्रेजुएशन के तीन साल अहम
ग्रेजुएशन के तीन साल हमारी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण साल होते हैं। लोग दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को कॅरिअर का आधार मानते हैं, लेकिन उनसे कहीं ज्यादा इन तीन वर्षों की अहमियत होती है।

इस दौरान ईमानदारी से किए गए प्रयास हमारी पूरी जिंदगी में काम आते हैं। इन तीन वर्षों के भरपूर उपयोग के लिए मैं सख्त के बजाय ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार कर रहा हूं कि टीचर और स्टूडेंट को क्लास में उपस्थित रहना ही पड़ेगा।

हर रोज दो क्लास करूंगा विजिट
मेरा प्रयास है कि सभी डिपार्टमेंट के शिक्षक अपना 100 प्रतिशत योगदान दें। नियमित क्लास लें, क्योंकि पढ़ाई से जरूरी और कोई भी काम नहीं।

मेरे लिए भी पढ़ाई 90 प्रतिशत है और ऑफिस से जुड़ा कागजों का काम सिर्फ दस प्रतिशत। मैंने सोच रखा है कि हर दिन कम से कम दो डिपार्टमेंट में मैं खुद जाकर देखूं कि टीचर क्या पढ़ा रहे हैं? वे रेगुलर क्लास ले रहे या नहीं?

अपनी परेशानियों में उलझा था एलयू
13 मई 2013 को जब मैंने लविवि के कुलपति का पदभार संभाला तो यहां का ज्यादातर सिस्टम खुद की समस्याओं में उलझा था। मेरे सामने पहला लक्ष्य समय से परीक्षा परिणाम जारी कराना था ताकि सत्र समय से पूरा हो।
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प्रयास किए तो ज्यादातर परीक्षा परिणाम एक माह पहले ही आ गए। कुछ बचे हैं, वह भी जल्द आ जाएंगे। नई जनरेशन आईटी फ्रेंडली है। इसे ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन एडमिशन शुरू कराए, जिससे वे घर पर बैठकर डिसाइड कर सकें कि उन्हें कौन से सब्जेक्ट लेने हैं?

कुछ खामियां सामने आईं और शेड्यूल आठ दिन लेट हुआ, लेकिन इन्हें अगली बार दूर कर लिया जाएगा।
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