उत्तर प्रदेश में दशकों से बिजली एक बड़ी समस्या है। इसी वर्ष गर्मियों और उमस भरे मौसम में सूबे में सर्वाधिक मांग 13,000 मेगावाट तक पहुंच गई थी। जबकि आपूर्ति 10,000 मेगावाट के करीब थी।
बेशक बिजली चोरी और ट्रांसमिशन लॉस के कारण पर्याप्त बिजली लोगों तक नहीं पहुंच पाती है। मगर मुश्किल सिर्फ यही नहीं है। वजह चाहे जो हो, लोग बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। सर्वे में शामिल 92 फीसदी लोग बिजली की इस कमी के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार मानते हैं।
हैरत की बात है कि ऐसा मानने वालों का प्रतिशत छोटे शहरों की तुलना में बड़े शहरों में अधिक है। मसलन मेरठ के 99 फीसदी लोगों की राय थी कि बिजली संकट के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है।
सत्ता का केंद्र माने जानी वाली सूबे की राजधारी लखनऊ में सिर्फ चार फीसदी प्रतिभागियों ने बिजली संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सर्वाधिक 22 फीसदी को लगता है कि सूबे में बिजली की दुर्दशा केंद्र सरकार की वजह से है।
जबकि सर्वे में शामिल 92 फीसदी लोग कम बिजली के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार मानते हैं।