दिल्ली-एनसीआर में डीजल कैब पर पाबंदी से बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) कंपनियों में रोजगार की संभावनाएं काफी धूमिल हो गई हैं। इस सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेशनल से लेकर डोमेस्टिक बीपीओ तक ने अपने यहां हायरिंग को काफी हद तक विराम दे दिया है। कैब सर्विस बीपीओ की लाइफ लाइन है। इसके प्रभावित होने से कंपनियों का समीकरण बिगड़ने लगा है।
हायरिंग थमने से युवाओं के लिए यहां रोजगार की संभावनाएं काफी धूमिल हो गई हैं। इसका नकारात्मक असर कैंपस प्लेसमेंट पर भी पड़ने जा रहा है। गुड़गांव का नाम देश के बड़े बीपीओ हब में शुमार है। यहां दिल्ली-एनसीआर ही नहीं देशभर के दक्ष युवाओं को इन कंपनियों में रोजगार मिलता है। कई कंपनियों ने अपने यहां हायरिंग की योजना तैयार की थी। मगर अचानक डीजल कैब के परिचालन पर रोक से उनकी गणित बिगड़ गई है। बीपीओ में कार्यरत मैन पावर के पिक एंड ड्रॉपिंग का सिस्टम प्रभावित होने का असर अमेरिका और यूरोप से प्राप्त आउटसोर्सिंग डिमांड को पूरा करने पर पड़ रहा है।
इससे बीपीओ कंपनियां काफी दिक्कत में आ गई हैं। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में अपनी साख बचाना ही बड़ी चुनौती है। हाइटेक इंडिया के अध्यक्ष प्रदीप यादव का कहना है कि गुड़गांव से काफी बीपीओ कंपनियों का पहले ही पलायन हो चुका है। कईयों ने यहां से अपना ऑपरेशन कहीं और शिफ्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब डीजल कैब पर पाबंदी ने उन्हें नई मुसीबत में डाल दिया है। ऐसे में उनके समक्ष अस्तित्व की लड़ाई का संकट खड़ा हो गया है।
ऐसे में हायरिंग के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है। प्राइम कॉल कंसल्टेंसी की एचआर डायरेक्टर विनीता का कहना है कि हायरिंग की रफ्तार पहले से ही कम थी अब यह पूरी तरह से बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि गुड़गांव से क्लाइंट्स ने अन्य जगहों पर शिफ्ट होना शुरू कर दिया है।
बीपीओ को नैस्कॉम का सहारा...
डीजल कैब पर पाबंदी के बाद बीपीओ कंपनियों को अपने सबसे बड़े संघ नैस्कॉम (नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड कंपनीज) से सहारे की उम्मीद है। नैस्कॉम का कहना है कि वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जाएगी। गुड़गांव में बीपीओ और कॉल सेंटर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में विशेष भूमिका निभाते हैं। बीपीओ कंपनी में अधिकारी सुशील कुमार बताते हैं कि डीजल कैब बंद होने से कंपनियों की हायरिंग पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अगर यह लंबा चलता है कि युवाओं नई नौकरियों की बात तो दूर जो कार्यरत हैं उन पर भी संकट आ सकता है।
कोट
गुड़गांव बीपीओ का बड़ा हब है। इन कंपनियों में करीब डेढ़ लाख प्रत्यक्ष रोजगार हैं। डीजल कैब पर पाबंदी से कंपनियों को दिक्कत हो रही है। इन कंपनियों में हायरिंग की प्रक्रिया धीमी है इसमें और गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता है। नैस्कॉम ने इन कंपनियों की परेशानी को उठाया है। ...एमके सरदाना, जनरल मैनेजर, आईटी गुड़गांव