2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में महज 46.9 फीसदी घरों में शौचालय की सुविधा है, जबकि 49.8 फीसदी आबादी शौच के लिए खुले स्थानों का प्रयोग करती है।
बाकी आबादी सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के लोगों में अपने शहरों के तस्वीर राष्ट्रीय आंकड़ों से बेहतर है। लोग मानते हैं कि शहरी इलाकों में 84 फीसदी घरों में निजी शौचालय हैं, जबकि 8 फीसदी घरों में साझा शौचालयों का प्रयोग हो रहा है।
तीन फीसदी लोग सार्वजनिक शौचालयों के भरोसे हैं। आबादी के हिसाब से पांच प्रतिशत बड़ी संख्या होती है और शहरी इलाकों में लोग खुले स्थानों पर शौच करते हैं। नालियों की बात करें तो 84 फीसदी घरों में बंद नालियां हैं, जबकि 16 फीसदी घरों में खुली नालियों का प्रयोग हो रहा है।