रुड़की के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। यही नहीं, विभागीय टीम के बार-बार समझाने पर भी परिजनों ने घर सैनिटाइज कराने से इनकार कर दिया। वहीं, शनिवार को रुड़की क्षेत्र में पांच अन्य लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।
गंगनहर कोतवाली क्षेत्र में मालवीय चौक के समीप स्थित एक कॉलोनी निवासी व्यक्ति की तबीयत कुछ दिन से खराब चल रही थी। दो दिन पहले परिजनों ने उसकी कोविड जांच कराई थी। शुक्रवार को आई रिपोर्ट में व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया। इसकी जानकारी परिजनों ने सिविल अस्पताल को दी। उन्होंने अस्पताल से सुबह एंबुलेंस भेजने के लिए कहा।
डॉ. दिग्विजय ने बताया कि सुबह जब परिजनों से संपर्क किया गया तो पता चला कि उन्होंने रात में ही मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कर दिया था, जहां इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मृतक के परिजनों से दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया। काफी देर बार टीम मृतक के घर पहुंची, लेकिन तब तक परिजन शव का अंतिम संस्कार कर चुके थे। उनका कहना था कि कोविड गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम संस्कार किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर को सैनिटाइज कराने के लिए कहा तो परिजनों ने इनकार कर दिया। कई बार समझाने के बावजूद परिजन नहीं माने। सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि अभी कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसलिए महामारी को गंभीरता से लेते हुए नियमों का पालन करना चाहिए। शहर में जगह-जगह टीकाकरण केंद्र खोले जा रहे हैं। कोरोना योद्धाओं और बुजुर्गों को आगे आकर टीकाकरण करवाना चाहिए। तभी कोरोना संक्रमण की चेन टूटेगी। उन्होंने बताया कि शनिवार को रुड़की में चार और नारसन के एक व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई।
अल्मोड़ा जिला अस्पताल का एक गार्ड कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। उसने 14 मार्च को होने वाली एक परीक्षा के लिए आरटीपीसीआर जांच करवाई थी, जिसमें वह संक्रमित पाया गया, जबकि उसमें जांच से पहले संक्रमण के कोई लक्षण नहीं थे। गार्ड में संक्रमण की पुष्टि करते हुए जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. आरसी पंत ने बताया कि सुरक्षाकर्मी को होम आइसोलेट कर दिया गया है।
डा. आरसी पंत ने बताया कि सुरक्षा गार्ड को 25 जनवरी को कोरोना टीके की पहली डोज लगाई गई थी। इसके बाद 27 फरवरी को उसने दूसरा टीका लगवाया था। उनका कहना है कि कोरोना के टीके लगने के बाद कोरोना पॉजिटिव निकलना कुछेक मामलों में अपवाद हो सकता है। बता दें कि अल्मोड़ा जिले में 16 जनवरी को टीकाकरण का शुभारंभ हुआ था।
टीका लगाने के बाद भी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकल सकती है, लेकिन टीका लगाने के बाद ऐसा होने की संभावना बहुत कम रह जाती है। कुछ मामलों में रिपोर्ट पॉजिटिव आए भी तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। टीका लगाने से संक्रमण का प्रभाव काफी कम हो जाता है।
- डॉ. दीपंकर डेनियल, एसीएमओ अल्मोड़ा
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान में सेना के अस्पतालों में भी वैक्सीन लगाई जाएगी। केंद्र की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सेना अस्पतालों में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवार के बुजुर्गों को कोविड वैक्सीन लगाने की सुविधा मिलेगी।
प्रदेश में 16 जनवरी से स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कोविड टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। दूसरे चरण में फ्रंटलाइन वर्करों को वैक्सीन लगाई जा रही है। टीकाकरण का तीसरा चरण एक मार्च से शुरू हुआ है। जिसमें 60 साल से अधिक आयु वर्ग और 45 से 59 आयु वर्ग के गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को कोविड वैक्सीन लगाई जा रही है। तीसरे चरण में कोविड वैक्सीन लगवाने वाले बुजुर्गों की संख्या अधिक है। केंद्र सरकार ने टीकाकरण में तेजी लाने के लिए सेना अस्पतालों में टीकाकरण शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड सैनिक बहुल प्रदेश है। यहां पर कार्यरत सैनिकों व पूर्व सैनिकों की तादाद सबसे अधिक है। सेना अस्पतालों में सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके परिवार के बुजुर्गों को कोविड वैक्सीन लगाई जाएगी। प्रदेश में देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चंपावत, उत्तरकाशी जिले में सेना अस्पताल में है। जहां पर सैनिक, पूर्व सैनिकों को चिकित्सा सुविधा दी जाती है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. सरोज नैथानी का कहना है कि केंद्र की ओर से सेना अस्पतालों में भी कोविड वैक्सीन लगाने के लिए पत्र मिला है। सेना अस्पताल देहरादून में टीकाकरण की सुविधा है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में स्थापित सेना अस्पतालों से वैक्सीनेशन के लिए संपर्क किया जा रहा है।