घर के 450 सालों के पुराने ट्रेडिशन में ही हम बडे़ हुए हैं। घर पर 15 से 16 घंटे शहनाई बजती थीं। यूं कहे कि शहनाई ही हमारी जिंदगी है। हंसते हुए यह बात संजीव शंकर ने बताई, जिन्होंने अपने घराने और शहनाई के ट्रेडिशन पर जमकर बातचीत की।
मशहूर शहनाई वादक पंडित दया शंकर के दोनों बेटे शंकर ब्रदर्स संजीव और अश्विनी शंकर वीरवार को शहर में स्पिक मैके चंडीगढ़ की ओर से आयोजित क्लासिकल म्यूजिक शो की प्रस्तुति देने पहुंचे। स्पिक मैके की ओर से शंकर ब्रदर्स ने शहनाई वादन की गवर्नमेंट होम साइंस कालेज सेक्टर-10 और पेक आडिटोरियम में शानदार प्रस्तुति दी।
राग पुरी कल्याण और ठुमरी से सजी शाम
करीब डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति में शंकर ब्रदर्स ने बेहद शानदार शहनाई वादन की प्रस्तुति दी। उन्होंने शुरुआत राग पुरी कल्याण से की। इसके बाद उन्होंने ठुमरी भी पेश की। शंकर ब्रदर्स की कृष्ण राधा प्रसंग श्रोताओं ने खूब पसंद किया। इस प्रस्तुति को देखने इतनी संख्या में श्रोता पहुंचे, कि हाल में बैठने की जगह तक नहीं थीं।
दादा जी रियाज को लेकर बेहद गंभीर थे
शंकर ब्रदर्स में संजीव और अश्वनी ने अपने शो के बाद बताया कि उनको शहनाई वादन अपने दादा पंडित अनंत लाल से सीखने को मिली। जो रियाज में बिलकुल भी ढील पसंद नहीं करते थे। वे रियाज को लेकर बेहद गंभीर थे। दोनों भाइयों ने कहा कि शहनाई इंस्ट्रूमेंट प्ले करना मुश्किल है, इसलिए जल्दी से युवा इसको नहीं चुनते।
लेकिन युवाओं को शहनाई वादन में आगे आना चाहिए। दोनों भाइयों ने कहा कि वे अपने खानदान की 13वीं पीढ़ी हैं और वे शहनाई वादन के अपने इतने पुराने ट्रेडिशन को बचाने के लिए इसे कर रहे हैं। संजीव ने कहा कि बड़े आर्टिस्ट के साथ प्रमोट करने में एक्सप्रोजटर मिलता है, जिससे युवाओं को और अच्छा करने की प्रेरणा मिली।