फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदहाल सड़कों से आधी जनता परेशान

Mon, 12 Jan 2015 02:23 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
यात्रा सुरक्षित भी हो और सुकून भरी भी। घर से निकले हर आदमी की यही तमन्ना होती है। लेकिन सूबे की सड़कें ऐसा सुकून नहीं देतीं। कभी सड़क के गड्ढे परेशान करते हैं, तो कभी सड़क ही मौत का सबब बन जाती है।
विज्ञापन


राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक 2013 में सड़क हादसों में देश में सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में हुई थीं। एनसीआरबी की रिपोर्ट में बताया गया कि 2013 में सड़क हादसों में देश में 1,37,423 व्यक्तियों की जान गई। उत्तर प्रदेश में उस वर्ष मरने वालों की संख्या 15,630 थी। रिपोर्ट में दूसरे पायदान पर तमिलनाडु था, जहां 15,563 लोगों की जान सड़क हादसों में गई।


हंसा रिसर्च के सर्वे का भी निष्कर्ष है कि उत्तर प्रदेश की सड़कों की हालत खस्ता है। 11 शहरों में किए गए सर्वे को प्रदेश का आईना मानें, तो महज 22 फीसदी प्रतिभागियों ने ही कहा है कि प्रदेश में सड़कों की हालत संतोषजनक है। 47 फीसदी प्रतिभागी अपने शहरों की सड़कों की हालत से बेहद निराश हैं।
विज्ञापन


48 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण खराब सड़कें ही हैं। कानपुर, मुरादाबाद और अलीगढ़ में ऐसे लोगों की संख्या काफी है।

सर्वे में सड़कों की दुर्दशा के कई कारण गिनाए गए। 90 फीसदी ने माना कि निर्माण का घटिया स्तर सड़कों की खराब हालत के लिए जिम्मेदार है। 78 फीसदी की राय यह भी है कि योजनाबद्ध न होने की वजह से सड़कों की खराब हालत है।

सरकार और निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को भी 65 फीसदी ने सड़कों की खराब हालत का कारण माना है। सड़क में गड्ढे, चौड़ाई, सफाई, रोशनी और सुरक्षा जैसे पैमानों पर भी अधिकांश इलाकों में सड़कें खरी नहीं उतरतीं। सर्वे में शामिल शहरों में प्रदेश की राजधानी लखनऊ ही ऐसा शहर है, जहां की सड़कों की तारीफ हुई है। शहर के प्रतिभागियों ने वहां सड़कों की हालत पर संतोष जताया है।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें