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सुपर स्पेशियलिटी इमरजेंसी तैयार

Sun, 02 Feb 2014 10:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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एक ही छत के नीचे समग्र स्वास्थ्य की सोच के साथ इस संस्थान की शुरुआत की गई है। सामान्य इलाज से लेकर सुपरस्पेशियलिटी सेंटर तक सब कुछ एक ही छत के नीचे होगा।
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इसी तरह डिप्लोमा से लेकर डिग्री, मास्टर डिग्री और रिसर्च तक हर स्तर की पढ़ाई यहां उपलब्ध होगी। जल्द ही सुरस्पेशियलिटी इमरजेंसी भी हम शुरू करने जा रहे हैं।

इसी महीने महीने इसकी शुरुआत की उम्मीद है। हफ्ते भर में कुछ सीनियर रेजीडेंट के पद स्वीकृत होने की उम्मीद है। उसके बाद हम इमरजेंसी की शुरुआत कर देंगे। सबसे पहले कार्डियोलॉजी इमरजेंसी और न्यूरो इमरजेंसी शुरू करेंगे।
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हमारे प्रदेश में अभी तक दो तरह की मेडिकल शिक्षा और चिकित्सा के संस्थान हैं। एक वे जहां डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम चलते हैं और सामान्य इलाज मिलता है। दूसरे वे हैं जहां सिर्फ सुपरस्पेशियलिटी सुविधाएं हैं।

इस संस्थान में हम दोनों तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। एक कैंपस में हर तरह की सुविधाओं वाला यह प्रदेश का पहला केंद्र होगा। इस संस्थान की मंशा विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

कुछ तो ऐसी सुविधाएं हैं जो देश में कुछ ही संस्थानों के पास हैं। जिस तरह की सुविधाएं यहां चाहिए उसकेलिए हमें अभी और डॉक्टर एवं अन्य स्टाफ  की जरूरत है।

अभी हमारे पास 61 पद हैं। सुपर स्पेशियलिटी केलिए ही करीब 40 पद और चाहिए। हालांकि सरकार हर तरह से मदद कर रही है। इसी महीने कुछ पद भी हमें और मिलने की उम्मीद है।

शुरू होंगे डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी
एमडी, डीएम और एमसीएच की पढ़ाई यहां शुरू हो चुकी है। अब एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने जा रहे हैं। इसके बाद हम जल्द ही डिप्लोमा भी शुरू करेंगे। पहले रेडियोथेरेपी और फिर रेडियोलॉजी व एनेस्थियोलॉजी में डिप्लोमा की शुरुआत होगी। नए पद मिलते ही हम ये डिप्लोमा शुरू कर देंगे। इसके जरिए अच्छे डॉक्टर और शिक्षकों केसाथ पैरा स्टाफ भी तैयार हो सकेगा।

प्रदेश को मिलेगा न्यूक्लियर मेडिसिन का लाभ
हम न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग को और विकसित कर रहे हैं। इस डिर्पामेंट के तहत हमने जांचें तो शुरू कर ही दी हैं। जहां रेडियोएक्टिविटी के जरिए जांच की सुविधा नहीं है, वे हमारे पास सैंपल भेजते हैं। हम दूसरे ही दिन जांच करके रिपोर्ट भेज देते हैं।

इसका लाभ यह हो रहा है कि जो जांच लोगों को पांच-छह हमार में करानी होती थी, वह एक हजार रुपए में हो जाती है। जब इस विभाग को विकसित कर लेंगे तो इलाज केलिए भी दूसरे मेडिकल कॉलेज और अस्पताल हमारे यहां मरीजों को भेज सकेंगे।

खासतौर से ट्यूमर और कैंसर के लिए यह बहुत उपयोगी होगा। अभी रेडियोथेरेपी में शरीर केदूसरे हिस्से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। न्यूक्लियर मेडिसिन केजरिए सिर्फ हम उसी हिस्से की थेरेपी आसानी से कर सकेंगे जहां ट्यूमर या कैंसर है।

ऑनलाइन लाइब्रेरी और वाई-फाई कैंपस
हम संस्थान में अत्याधुनिक ऑनलाइन लाइब्रेरी बना रहे हैं। अपनी सभी किताबें और जर्नल तो ऑनलाइन होंगे ही, इसके अलावा दूसरे संस्थानों को भी इससे जोड़ेंगे।

सभी संस्थानों के छात्र और शिक्षक एक-दूसरे के जर्नल ऑनलाइन पढ़ सकेंगे। पूरे कैंपस को वाई-फाई बनाया जा रहा है। हमारा एकेडमिक ब्लॉक बनकर लगभग तैयार हो चुका है। इसमें 42 डिपार्टमेंट होंगे। वहां पर सेंट्रल रिसर्च फैसिलिटी भी उपलब्ध होगी।
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