कहावत है कि 'जाको राखे साइंया मार सके न कोय'। इस कहावत का साक्षात उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला।
भारत नेपाल की बनबसा सीमा पर जहां सगी मां नवजात को बोरे में बंद कर मरने के लिए छोड़ गई,वहीं एक पराई औरत ने नवजात की जान बचा ली। बोरे में बंद बच्चे को जिंदा देख महिला की आंखे आंसुओं से भर गई।
नेपाल के गड्डा चौकी निवासी शांति श्रेष्ठ तीन मार्च की सुबह पशुओं के लिए चारा लेने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जंगल जा रही थी कि सीमा स्तंभ संख्या सात के पास नो मैंस लैंड में बंद बोरा हिलता डुलता दिखाई दिया। आज उस नवजात को सगी मां से भी बढ़कर प्यार और दुलार मिल रहा है।