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Mother's day: सगी मां ने मरने को छोड़ा, पराई ने बचाई जान

Sun, 14 May 2017 10:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चंपावत
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newborn - फोटो : file photo
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कहावत है क‌ि 'जाको राखे साइंया मार सके न कोय'। इस कहावत का साक्षात उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला। 
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भारत नेपाल की बनबसा सीमा पर जहां सगी मां नवजात को बोरे में बंद कर मरने के ल‌िए छोड़ गई,वहीं एक पराई औरत ने नवजात की जान बचा ली। बोरे में बंद बच्चे को ‌जिंदा देख महिला की आंखे आंसुओं से भर गई।  

नेपाल के गड्डा चौकी निवासी शांति श्रेष्ठ तीन मार्च की सुबह पशुओं के लिए चारा लेने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जंगल जा रही थी कि सीमा स्तंभ संख्या सात के पास नो मैंस लैंड में बंद बोरा हिलता डुलता दिखाई दिया। आज उस नवजात को सगी मां से भी बढ़कर प्यार और दुलार मिल रहा है।
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जांच के लिए ले गए अस्पताल

Newborn - फोटो : ‌file photo
जब शांति ने बोरे को खोला तो अंदर जीवित नवजात को देखकर दंग रह गई। इस बीच वहां लोगों की भीड़ जुट गई। जो भी वहां पहुंचा वह नवजात को इस हाल में छोड़ने वाली मां को कोसता नजर आया।

सूचना पर नेपाल सशस्त्र पुलिस के डीएसपी नेत्र केसी एवं पुलिस उप निरीक्षक हरी दत्त बडू ने मौके पर पहुंचकर नवजात को कब्जे में लिया। 

डीएसपी ने बताया कि नवजात बालक है और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए उसे जिला अस्पताल ले जाया गया है। प्रमुख जिला अधिकारी की अध्यक्षता वाली प्रशासनिक समिति के निर्णय पर औपचारिक कार्रवाई के बाद उसे किसी को गोद दिया जाएगा।

बताया गया कि जिस कपड़े में बच्चा लिपटा मिला है वह कपड़ा नेपाल के अस्पताल में ही बच्चे के जन्म के समय दिया जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह बच्चा किसी नेपाली महिला का ही है।
 
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