सीतापुर जेल में बंद रामपुर के सांसद आजम खां की जमानत पर सुनवाई फिर टल गई। जमानती प्रार्थना पत्र में आपराधिक इतिहास का जिक्र न होने पर अभियोजन पक्ष ने आपत्ति लगा दी। जिस पर अदालत ने अगली सुनवाई के लिए चार नवंबर की तारीख तय की है।
छजलैट के बारह साल पुराने हाईवे जाम और बवाल मामले में पूर्व मंत्री आजम खां आरोपी हैं। उस वक्त आजम खां अपने परिवार के साथ मुजफ्फरनगर एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। छजलैट थाने के सामने पुलिस ने आजम खां की गाड़ी रुकवा कर चेकिंग की थी। जिसके विरोध में आजम खां वहीं सड़क पर बैठ गए थे। इसकी जानकारी मिलने पर मुरादाबाद समेत आस पड़ोस के जनपदों से भी आजम खां के समर्थन में सपा नेता और कार्यकर्ता पहुंच गए थे और हंगामा किया था।
तब पुलिस ने आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, विधायक हाजी इकराम कुरैशी, अमरोहा के विधायक महबूब अली, नूरपुर विधायक नईमुल हसन, नगीना विधायक मनोज पारस समेत अन्य को आरोपी बनाते हुए केस दर्ज किया था।
इस केस की सुनवाई एमपी/एमएलए स्पेशल न्यायाधीश एडीजे-2 पुनीत गुप्ता की अदालत में चल रही है। आजम खां लंबे समय तक कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे। पुलिस ने आजम आजम खां के खिलाफ एक और केस अदालत के आदेशों की अवहेलना करने (174 ए) के तहत दर्ज किया था। इस केस में जमानत के लिए आजम खां ने अपने अधिवक्ता शाहनवाज सिब्तेन के जरिये अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। शुक्रवार को अदालत में जमानती प्रार्थना पत्र पर सुनवाई होनी थी।
लेकिन अभियोजन पक्ष ने प्रार्थना पत्र में आजम खां के आपराधिक इतिहास का जिक्र न होने पर आपत्ति लगा दी। जिस कारण सुनवाई टल गई। अब अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए चार नवंबर की तारीख तय की है। इस दौरान सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीष भटनागर अदालत में उपस्थित रहे।