जम्मू विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर चंद्र अपने कार्यालय में फंदा लगा लेते हैं। कार्यालय में मौजूद बोर्ड पर वह लिखकर जाते हैं कि सब सच है, क्योंकि कहानी झूठी है। झूठ क्या है, इस सवाल का जवाब दो महीने बाद भी नहीं मिल पाया है। सिर्फ एक ही सच सबके सामने है कि 54 दिन की पुलिस जांच, जम्मू विवि के उपकुलपति से लेकर मनोविज्ञान विभाग, कैश कमेटी, विवि प्रशासन, शिकायत करने वाले छात्रा छात्राओं, पूर्व छात्राओं को मिलाकर करीब 50 लोगों से पूछताछ के बाद भी पुलिस इस नतीजे पर नहीं पहुंची कि आखिर सच क्या है।
एसोसिएट प्रोफेसर के खुदकुशी के बाद तमाम शिक्षक हड़ताल पर रहे। छात्रों ने भी विरोध कर किया। दलित मंच ने भी प्रदर्शन किया। मामले की जांच को लेकर एसआईटी बना दी गई। लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में एचओडी समेत कुछ अहम लोगों के बयान दर्ज होने अब भी बाकी हैं। हालांकि मामले की जांच कर रही एसपी ममता शर्मा का कहना है कि मामले की जांच अंतिम चरण में है। जल्द ही इसका खुलासा किया जाएगा।
रिपोर्ट का इंतजार
एसोसिएट चंद्रशेखर की पत्नी डॉ. नीता चंद्र का कहना है कि दो महीने होने को हैं। अब तक मामले की जांच रिपोर्ट नहीं आई। अब कहूं भी क्या कि पुलिस क्या कर रही है। मुझे कहा गया था कि इसके लिए समय लगता है। इंतजार कर रही हूं कि कब एसआईटी की रिपोर्ट आती है और इस रिपोर्ट में एसआईटी क्या कहती है। इसके बाद ही तय करूंगी कि आगे क्या करना है। फिलहाल तो उनको पुलिस ने कोई जानकारी नहीं दी है।
खमोश हो गए सब
जम्मू विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर चंद्रशेखर ने सात सिंतबर को आत्महत्या कर ली थी। जम्मू विवि शिक्षक संघ, छात्र संघ और दलित संगठनों ने मिलकर चंद्रशेखर की मौत पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। तमाम लोगों ने इंसाफ दिलाने तक संघर्ष करने का दावा किया। लेकिन इस मामले को ठंडे बस्ते में जाने पर सब खामोश हैं।