उन्हीं की उड़ान को पंख लगते हैं, जिनके हौसलों में दम होता है। मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो असंभव कुछ नहीं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है एसपी मोहित चावला ने। एक सपना देखा, आईपीएस बनना है। दूसरे क्षेत्र में नौकरी के कई मौके मिले पर इन्हें तो आईपीएस बनना था।
कड़ी मेहनत की और मकाम हासिल कर लिया, बिना किसी कोचिंग के। सात नौकरियां छोड़कर चावला आईपीएस बने हैं। बसों में सफर के दौरान भी पढ़ाई हुए पढ़ाई कर मोहित ने 2009 ने पहले ही प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की।
मूल रूप से कुल्लू जिले से संबंध रखने वाले मोहित चावला के माता-पिता अंबाला में बस गए हैं। पिता उन्हें बिजनेस में भागीदार बनाना चाहते थे। अंबाला में पिता की इच्छापूर्ति के लिए उन्होंने 12वीं की परीक्षा में टॉप (हरियाणा) करने के बाद बिजनेस भी संभाला और दूरवर्ती शिक्षा के माध्यम से बीकॉम की परीक्षा भी उत्तीर्ण की।
पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए की शिक्षा ग्रहण की। अर्थशास्त्र में नेट जेआरएफ की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। कई नौकरियां करने के बाद मां और बहन की प्रेरणा से मोहित ने आईपीएस की तैयारी शुरू की। सुबह और शाम बस में एक-एक घंटा पढ़ाई के अलावा तीन घंटे नियमित पढ़ाई के बाद 2009 में पहले प्रयास में परीक्षा पास की।
2011 में आइपीसी की ट्रेनिंग पूरी कर मोहित ने कांगड़ा में एएसपी का पदभार संभाला और 2014 में पदोन्नति होकर एसपी मंडी का कार्यभार ग्रहण किया। बेहतर सेवाओं के लिए मोहित को हरियाणा सरकार ने प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया है।
युवाओं को टिप्स
मोहित चावला सफलता के लिए मेहनत को मूल मंत्र मानते हैं। वे कहते हैं कि आईपीएस की परीक्षा पास करने के लिए कोचिंग की नहीं, बस लग्न के साथ ही पढ़ाई करने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी है।
पहले शिक्षक बने फिर आईपीएस
बिजनेस छोड़ने के बाद अध्यापक पद से कैरियर की शुरूआत करने वाले मोहित कर्मचारी से लेकर अधिकारी पदों पर काम कर चुके हैं। 2003 में शिक्षक, 2005 में डाक विभाग में बतौर असिस्टेंट पोस्टल, पूना में महाराष्ट्र बैंक में पीओ, बीओआई बैंक में प्रबंधक, आरबीआई और इंडियन इकोनोमिक्स सर्विसर्स में नौकरी छोड़ कर आईपीएस अधिकारी बने।