सूबे के शहरी लोगों की राय है कि वे सरकारी अस्पतालों की तुलना में इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों खासकर प्राइवेट क्लिनिक में जाना ज्यादा पसंद करते हैं।
हमारे सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार एक तिहाई लोगों ने ही कहा कि वे सरकारी अस्पताल में जाते हैं। आंकड़े ये भी बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों में जाने वाले लोग अधिकतर लोग निम्न आर्थिक वर्ग से आते हैं।
यानी आर्थिक रूप से सक्षम हुए तो लोग सरकारी की जगह निजी अस्पताल ही चुनते हैं। तो जो लोग सरकारी अस्पताल जा रहे हैं वो संतुष्ट हैं? आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश लोग सरकारी अस्पतालों से ख़ुश हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों को 10 में से साढ़े छह अंक तक दिए।
हालांकि आंकड़े ये भी बताते हैं कि निजी अस्पतालों में जाने वाले लोग वहां मिलने वाली सुविधाओं से थोड़ा अधिक खुश होते हैं। वे 10 में से साढ़े सात से आठ अंक तक देते हैं।
ऐसा क्यों है कि लोग सरकारी की जगह निजी अस्पतालों को चुनते हैं। इसका जवाब मिलता है सर्वेक्षण के आंकड़ों से। लोग मानते हैं कि डाक्टरों और नर्सों के व्यवहार से लेकर अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं, दवाइयों, अस्पतालों के रख-रखाव और स्वच्छता जैसे हर पहलू पर सरकारी अस्पताल से निजी बेहतर हैं। हालांकि इसके एवज में उन्हें कीमत अदा करनी पड़ती है।