देहरादून जिला प्रशासन में छोटे हाकिमों को इधर से उधर किया गया है। लेकिन सबसे काबिल और नियम-कानून के जानकार एक छोटे हाकिम को फाइलों के अंबार में बैठा दिया गया।
उनकी ईमानदारी उनके कैरियर के आड़े आ रही है। वह जहां जाते हैं सही काम करने लगते हैं। इससे सिफारिशी लोगों को तकलीफ होती है। एक बड़े हाकिम इसी में उनसे नाराज हो गए थे।
बड़े हाकिम ने एक काम के लिए कहा। उस काम से संबंधित नियमावली में लिखा था कि अगर अफसर चाहे तो विवेक से उक्त काम कर सकता है। बड़े हाकिम ने कहा कि अपने विवेक से इसे कर दो। छोटे हाकिम ने साफ कहा कि मेरा विवेक कहता है कि न करो, तो मैं नहीं करूंगा।
इस पर बड़े हाकिम गुस्सा कर बोले- तुम नहीं करोगे तो कोई और करेगा। छोटे हाकिम अड़े थे, बोले-किसी और से करवा लो। बाद में उनका परगना छिन गया। अब फिर तबादले हुए तो उन्होंने किसी परगना में जाने से मना कर दिया।
बोले-जिस परगना में भेजा जा रहा था वहां पहले भी रहा हूं। बड़े-बड़े काम किए थे लेकिन आरोप लगा कि फलां काम ही नहीं करता है। लगता है कि गलत काम करो तभी शासन मानता है कि काम कर रहा है।