पंजाब कला भवन के मंच पर तिब्बत की लोक गाथाओं को जीवंत करते हुए जिग्मे दरुपका ने बांसुरी वादन पेश किया। इंडियन काउंसिल फॉर क्लचरल रिलेशन और डिपार्टमेंट पब्लिक रिलेशन एंड कल्चरल अफेयर हरियाणा के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित हुआ था।
दरुपका ने प्रस्तुति से पहले एक खास बातचीत में बताया कि बांसुरी से उनका रिश्ता बहुत पुराना है। नौ साल की उम्र में उन्होंने बांसुरी का अभ्यास करना शुरू किया था।
उन्होंने बताया कि तिब्बत में शांत माहौल को अहमियत दी जाती है और बांसुरी से आध्यात्मिक शांती मिलती है। दरुपका ने कहा कि बांसुरी वादन में जोंदरा और पोदरा लोक संगीत है, जिनकी धुनों पर बांसुरी को बजाया जाता है।
दरुपका बांसुरी के साथ विश्व भर में प्रस्तुति दे चुके हैं। उनकी चंडीगढ़ में यह पहली प्रस्तुति थी। कार्यक्रम में शहरवासियों ने दरुपका की प्रस्तुति का आनंद उठाया।