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'हौंसले बुलंद हों तो खुद मिल जाती हैं मंजिलें'

Thu, 13 Nov 2014 02:11 PM IST
विक्रम ठाकुर/ अमर उजाला, स्वारघाट (बिलासपुर)
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किसी ने सही कहा है ....आगे बढ़ने के रास्ते कभी खत्म नहीं होते। बस दृढ़ निश्चय होना चाहिए। बुलंद हौसले के दम पर कामयाबी की हर इबारत लिखी जा सकती है। कुछ ऐसे ही जज्बे के साथ सहायक आयुक्त एवं स्वारघाट के बीडीओ सुनील वर्मा ने कामयाबी की इबारत लिखी है।
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महज 30 वर्ष की उम्र में कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने यह मुकाम पाया है। सुनील वर्मा अपने माता-पिता को आदर्श मानते हैं। सरकारी सेवा के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुटे हैं। अगस्त 2013 में ही उन्होंने हिमाचल प्रशासनिक सेवा का प्रशिक्षण पूरा किया है।

सात जुलाई, 2014 से स्वारघाट में बतौर बीडीओ तैनात हैं। सात जुलाई, 2014 को विकास खंड कार्यालय स्वारघाट में बतौर विकास खंड अधिकारी कार्यभार संभाला। पढ़ाई को एक एंटरटेनमेंट का जरिया मानते हुए आगे बढ़े। पढ़ाई को बोझ नहीं समझें। दिल किया तो पढ़ाई की, वरना नहीं।
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परीक्षा के दौरान हर रोज सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई में जुट जाते थे। उनका कहना है कि बस हौंसले बुलंद होने चाहिए मंजिलें अपने आप मिल जाती हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि नशे से दूर रहें तो वे आगे बढ़ सकते हैं।

लालपानी स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई
सुनील ने शिमला के लालपानी स्कूल से दसवीं तक की शिक्षा पूरी की। यहां टॉपर रहे। संजौली कॉलेज से बीएससी (नॉन मेडिकल) की। यहां भी टॉपर रहे। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से एमबीए के बाद इंदौर में कुछ समय के लिए वर्धमान कंपनी में ब्रांच हेड का कार्य किया। इसी दौरान यूजीसी की परीक्षा उत्तीर्ण की। बैंक ऑफ बड़ौदा में प्रोवेशनरी ऑफिसर का कार्य भी कर चुके हैं।

आईएएस परीक्षा की तैयारी में जुटे
सुनील वर्मा का कहना है कि इन दिनों वह आईएएस की अंतिम दौर में होने वाली परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए हैं। वह मूल रूप से वह ठियोग के रहने वाले हैं। घूमना, खेलना, म्यूजिक सुनना और फिल्में देखना उनकी हॉबी है। उन्होंने बताया कि उनके पिता बीएस वर्मा पशुपालन विभाग में बतौर उप सचिव कार्यरत है, तथा माता वंदना वर्मा गृहिणी हैं।
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