अमेरिका के प्रसिद्ध और मास्टर शेफ विकास खन्ना कहते हैं कि बचपन में चंडीगढ़ आना उनके लिए सपने जैसा होता था। उनके
बड़े भाई चंडीगढ़ के इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ते थे। उनसे मिलने के लिए
वह कभी कभी अमृतसर से चंडीगढ़ आते थे। अमृतसर में अक्सर लोग उन्हें कहते थे
कि चंडीगढ़ विदेशों की तरह है, वहां पढ़े लिखे लोग रहते हैं।
जब
वह चंडीगढ़ आते थे तो उनका भाई उन्हें कहता था या तो एक्सप्रेसो कॉफी
मिलेगी या तो सेक्टर-17 की मार्केट से खाना। विकास ने बताया कि पहले
चंडीगढ़ में एक्सप्रेसो काफी पीना बड़ी बात होती थी, लेकिन आज उसी शहर के
बड़े होटल में शेफ के साथ काफी पीकर बड़ा अच्छा लग रहा है।
विकास बताते हैं कि ओबामा को खास मुलाकात में कोई भारतीय व्यंजन नहीं अपितु भूटान की नेशनल डिश एमाडाशी खिलाई जो उन्हें खूब पसंद आई। मास्टर्स शेफ इंडिया से भारत के घर-घर में प्रसिद्धि पाने वाले विकास शुक्रवार को होटल जेडब्ल्यू मैरियट-35 में अपनी किताब ‘हाइम्स फ्राम द सॉयल’ को लांच करने पहुंचे।
पहली बार लिखी शाकाहारी व्यंजनों पर किताब
विकास ने बताया कि व्यंजनों पर किताब लिखना काफी मुश्किल काम है। अभी तक उनकी कुकिंग को लेकर जितनी भी किताबें छपी हैं वह नॉन वेज डिश पर आधारित थी। लोग अक्सर उनसे पूछते थे कि वह शाकाहारी लोगों के लिए किताब क्यों नहीं लिखते।
विकास ने कहा कि इस किताब ‘हाइम्स फ्राम द सॉयल’ में उन्होंने सिर्फ शाकाहारी व्यंजनों की रेसिपी बताई हैं। किताब में कुल 145 रेसिपी हैं। इस किताब की शुरुआत और अंत विकास ने कविता से की ही। उन्होेंने कहा कि शुरुआत की कविता धरती मां को समर्पित है।
विकास का मानना है कि हर कुक के लिए मिट्टी से जुड़ना सबसे अहम है, जो लोग मिट्टी से जुड़े रहते हैं उन्हें असली स्वाद का पता होता है और यही स्वाद उनके खाने में भी झलकता है। यह नेचुरल होता है जिसे कोई भी कहीं और से नहीं सीख सकता। इस किताब में उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों में पकने वाले शाकाहारी व्यंजनों को पेश किया है।
अब नहीं लिखेंगे किताब
विकास ने कहा कि ‘हाइम्स फ्राम द सॉयल’ उनकी आखिरी किताब होगी। इसके बाद वह कोई भी किताब नहीं लिखेंगे।
मां है बेस्ट कुक
विकास विश्व की कई नामी हस्तियों को अपने हाथ से कई लजीज डिश खिला चुके हैं, जिसके लिए उन्हें विश्वभर में ख्याति भी मिली है। लेकिन, उनके अनुसार सबसे बेस्ट कुक मां होती है। इस दौरान उनकी मां भी वहां मौजूद थीं।
बेटे को शेफ बनते नहीं देखना चाहती थी : बिंदु खन्ना
विकास की किताब की लांचिंग के दौरान उनकी मां भी मौजूद रहीं। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि बचपन में विकास बहुत शरारती था। पढ़ने लिखने में ध्यान नहीं रहता था, हर रोज स्कूल से शिकायतें आती थीं।
उन्होंने कहा कि विकास का भाई पढ़ने में बहुत अच्छा था, लेकिन जब विकास को देखती थी तो लगता था कि यह परिवार में एकदम अलग है। इसके शौक अलग है, पसंद अलग है। बिंदु ने कहा कि विकास बचपन में मिट्टी की कलाकृतियां बनाता था। साथ ही सिलाई कढ़ाई और एंब्रॉयडरी में भी बहुत अच्छा था।
विकास अक्सर किचन में कुछ-कुछ न बनाया करता था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि विकास शेफ बनना चाहता है तो उन्होंने इससे साफ मना कर दिया। क्योंकि उस वक्त इस प्रोफेशन को ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता था।
चितकारा यूनिवर्सिटी पहुंचे विकास
चंडीगढ़ आने से पहले विकास राजपुरा की चितकारा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ हॉस्पिटेलिटी पहुंचे। यहां उन्होंने स्टूडेंट्स से मुलाकात की। यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डॉ. मधु चितकारा ने कहा कि फूड एंड हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री में विकास एक रोल मॉडल हैं, जो लोग शेफ बनना चाहते हैं, उन्हें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।