हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में (जीटीआर) जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी सिद्धांत के पर देश-विदेश में शोधकर्ता चर्चा करेंगे। इसके लिए सीयू धर्मशाला के शाहपुर स्थित अस्थायी शैक्षणिक परिसर में सोमवार से विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश से करीब 30 शोधकर्ता भाग लेंगे, जबकि इस विषय के नौ वैज्ञानिक भी कार्यशाला में भाग ले रहे हैं।
सीयू के भौतिक और खगोल शास्त्र विभाग की आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी सोमवार से शुरू होगी, जबकि इसका समापन 12 मार्च को होगा। आयुका (इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर अस्ट्रॉनोमी एडं अस्ट्रोफिजिक्स) और विज्ञान एवं तकनीकी विभाग भारत सरकार के सहयोग से हो रही इस संगोष्ठी में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की ब्रह्मांड की उत्पत्ति और संरचना को समझने में उपयोगी जीटीआर सिद्धांत पर मुख्य रूप से चर्चा होगी।
इसके माध्यम से ही हाल ही में गुरुत्वाकर्षण बल की तर्ज पर गुरुत्व तरंग की खोज अमेरिका में हुई है। गुरुत्व तरंग पर शोधकर्ता अपने शोध पढ़ेंगे। संगोष्ठी के आयोजक सीयूएचपी के डॉ. भाग चंद चौहान और आयुका के प्रो तरुण सौरादीप ने बताया कि वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी सिद्धांत करीब सौ वर्ष पहले खोजा था।
लेकिन इस सिद्धांत पर कम काम हो पाया। लेकिन 1960 और 1970 के दशक में थ्योरेटिकल फिजिक्स, ब्लैक हॉल और एस्ट्रोफिजिक्स के स्वर्णिम युग के नाम से जाना जाता है। क्योंकि इस दशक में जीटीआर पर बहुत से शोध हुए। इससे जीटीआर थ्योरेटिकल फिजिक्स का केंद्र बिंदु बन गया।
वर्तमान में ब्रह्मांड की उत्पत्ति और संरचना को समझने के लिए जीटीआर का बहुत योगदान है। विश्व में इस पर बहुत से शोध हुए हैं। लेकिन भारत में इस विषय पर बहुत कम काम हुआ है। इसलिए सीयू धर्मशाला में जीटीआर पर संगोष्ठी का आयोजित की जा रही है।
नैक टीम करेगी ऊना कॉलेज का निरीक्षण- राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की टीम ऊना कॉलेज में 28 मार्च से 30 मार्च तक निरीक्षण करेगी। यह जानकारी प्राचार्य डा. एसके चावला ने दी। उन्होंने बताया कि नैक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का स्वायत संस्था है।
टीम में तीन सदस्य शामिल हैं। रिपोर्ट के आधार पर महाविद्यालय को ग्रेड दिए जाएंगे और कालेज को आगामी पांच वर्षों के लिए ग्रांट प्राप्त होगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए महाविद्यालय में प्रो. सुरेंद्र अत्री पर आधारित टीम भी तैयार की गई है।
नैक टीम महाविद्यालय में विभिन्न पहलुओं की गहनता से जांच करेगी, जिसमें पाठ्यक्रम पहलू शामिल हैं, जिसमें प्रारूप, विकास, कार्यान्वयन शामिल हैं। प्रशासन, नेतृत्व और प्रबंधन, जिसमें आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली की जांच शामिल है। डा. एसके चावला ने बताया कि इन्हीं के आधार पर यह टीम महाविद्यालय को ग्रेड प्रदान करेगी।