प्रवेश प्रक्रिया में देरी का खामियाजा लखनऊ विवि को एमफिल की रिक्त सीटों से चुकाना पड़ेगा। मंगलवार को हुई एमफिल की प्रवेश परीक्षा में 33 फीसदी से अधिक अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा में कुल 337 अभ्यर्थी पंजीकृत थे जिनमें से केवल 225 ही शामिल हुए। इसका बड़ा कारण प्रवेश में देरी है।
विवि ने 29 जुलाई को एमफिल के लिए प्रवेश प्रक्रिया बंद कर दी थी। लेकिन इसकी प्रवेश परीक्षा की तिथि घोषित करने में दो महीने का समय लगा दिया। इससे बहुत से अभ्यर्थियों ने अन्य जगह प्रवेश ले लिया।
नौ विषयों के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में केवल हिंदी व संस्कृत में ही सीटों से अधिक अभ्यर्थियों ने एग्जाम दिया। ऐसे में सात विषयों की सीटें रिक्त रहना तय है। वहीं संस्कृत में भी कुल सीटों से मात्र एक अभ्यर्थी अधिक है। आशंका भी जताई जा रही है कि कुछ अभ्यर्थियों द्वारा प्रवेश न लेने से इसकी सीटें भी खाली न रह जाएं।
सात विषयों में रिक्त रहेंगी सीटें
प्रवेश परीक्षा के दौरान समाज कार्य में 26, समाजशास्त्र में 29, संस्कृत में 31, राजनीति विज्ञान में 8, एआईएच में 19, अंग्रेजी में 20 व लोक प्रशासन में 6 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी है। इनमें 30-30 सीटें हैं।
एंथ्रोपोलॉजी में तो 10 सीटों के सापेक्ष मात्र एक अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हुआ। केवल हिंदी में 30 रेग्युलर व 20 सेल्फ फाइनेन्स सीटों के लिए कुल 85 ने परीक्षा दी है।
यह तय है कि लोक प्रशासन में 24, राजनीति विज्ञान में 22, एआईएच में 11, अंग्रेजी में 10, एंथ्रोपोलॉजी में नौ, समाज कार्य में चार व समाजशास्त्र में एक सीट रिक्त रह जाएगी।