उत्तराखंड में ज्यादातर विश्वविद्यालयों का सिस्टम पटरी से उतरता जा रहा है। राजभवन और सरकार के बीच जारी खींचतान के चलते कई विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर के पद पर कामचलाऊ व्यवस्था ने हालात और ज्यादा खराब कर दिए हैं। राज्य सरकार के तीन विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जिनमें नियमित वाइस चांसलर नहीं हैं।
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर
यहां पर पिछले साढ़े तीन साल से वाइस चांसलर नहीं है। प्रो. बीएस बिष्ट का कार्यकाल समाप्त हुआ तो राज्यपाल ने बिष्ट को छह-छह महीने के दो टर्म दिए। लेकिन नियमित वीसी नहीं मिला तो वरिष्ठ आईएएस सुभाष कुमार को छह-छह महीने के दो टर्म देकर एक साल तक वीसी बनाए रखा।
इसके बाद उन्हें दो टर्म से ज्यादा नहीं दिया जा सकता था तो फिर वरिष्ठ आईएएस (अब रिटायर) आलोक कुमार जैन को एक साल तक कुलपति बनाकर रखा।
इसी तरह से तीन वर्ष गुजर गए और पंतनगर को वीसी नहीं मिला। अब औद्यानिकी व वानिकी विवि भरसार के कुलपति मैथ्यू प्रसाद को पंतनगर का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है।
औद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय भरसार, पौड़ी
18 अगस्त को इस विवि में कुलपति के पद पर मैथ्यू प्रसाद का तीन साल कार्यकाल समाप्त हो चुका है। प्रसाद के कार्यकाल को छह महीने बढ़ा दिया गया।
यहां प्रसाद के कार्यवाहक होने के बावजूद उन्हें राजभवन ने पंतनगर के कुलपति का चार्ज भी छह माह के लिए दे दिया। जो पहले से ही कार्यवाहक है उसे एक और विवि का कार्यवाहक कुलपति बना दिया गया।
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, देहरादून
करीब एक साल पहले दुर्ग सिंह चौहान ने बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते इस विश्वविद्यालय के कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से अभी तक रेगुलर कुलपति की नियुक्ति नहीं हो सकी।
इस विश्वविद्यालय के कुलपति का चार्ज दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वीके जैन के पास ही है। वीके जैन का खुद का कार्यकाल समाप्त होने वाला है।