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भारी गड़बड़ी के कारण यूपीटीयू कैंपस का निर्माण रुका

Thu, 10 Apr 2014 02:28 PM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के जानकीपुरम में बन रहे नए कैंपस का निर्माण रोकने का आदेश दिया गया है।
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कार्यपरिषद की बैठक में कुलपति डॉ. आरके खांडल ने बताया कि निर्माण कार्य के बारे में कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम से बिल्डिंग की डिजाइन, पर्यावरण की एनओसी व कार्य की गुणवत्ता आदि से जुड़े सवाल पूछे गए थे।

उससे इस मामले में 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया था लेकिन महीना भर से अधिक समय बीतने के बाद अभी तक उसकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।

कार्यपरिषद ने कुलपति के फैसले पर निर्माण रोकने पर हरी झंडी दे दी है। अब इस मामले में टेक्निकल एक्सपर्ट की कमेटी बनाकर जांच की जाएगी। कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार ही कोई फैसला लिया जाएगा।
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जानकीपुरम में 32 एकड़ पर बनाए जा रहे यूपीटीयू के न्यू कैंपस के निर्माण में हो रहे खेल पर बीते छह अप्रैल को अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की थी।

इसमें निर्माण पर कुलपति डॉ. आरके खांडल की ओर से उठाए सवालों और राजकीय निर्माण निगम की ओर से उसका जवाब न देने का मुद्दा उठाया गया था।

बुधवार को कार्यपरिषद की बैठक में कहा गया कि आखिर इस कैंपस के निर्माण में अगर गड़बड़ी हो रही है तो उसे सामने लाया जाए। इसके लिए टेक्निकल एक्सपर्ट की कमेटी जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला होगा।

मालूम हो कि इस कैंपस के निर्माण के नाम पर ही बीते दिनों यूपीटीयू में 806 करोड़ रुपये का फर्जी ठेका दिया गया है। इसके एवज में 23.56 करोड़ रुपये का फर्जी चेक भी जारी कर दिया गया।

इसे लेकर यूपीटीयू प्रशासन खुद सकते में है। दरअसल, फर्स्ट फेज में जो निर्माण कार्य होना था, वह जुलाई 2012 में ही पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन इसे पहले किसान आंदोलन और फिर यूपीटीयू के ही कुछ अधिकारियों ने जान-बूझकर फंसाए रखा।

फर्जी ठेके के नाम पर हुए खेल में फंसेंगे बड़े
यूपीटीयू में 806 करोड़ रुपये का फर्जी ठेका देने के नाम पर पूरा खेल यूनिवर्सिटी में ही हुआ है। पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के बिचौलिए कैंपस में आकर अधिकारियों से मिले भी हैं।
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ऐसे में अब इस पूरे खेल में कुछ बड़े फंस सकते हैं। इधर, इस मामले में अब तक एफआईआर नहीं हुई है। फिलहाल, इस मामले में अब पुलिस प्रशासन कॉल डिटेल निकलवाकर मामले का पर्दाफाश करने की कोशिश करेगी। इधर, पारिख कंस्ट्रक्शन कंपनी के नुमाइंदों का अभी तक सामने न आने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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