इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) को इनोवेशन यूनिवर्सिटी बनाने का खाका खींचा जा रहा है। यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल ने इनोवेशन यूनिवर्सिटी बनाए जाने का पूरा एजेंडा तैयार कर लिया है।
अब इसे जल्द ही शासन को भेज दिया जाएगा। इसी महीने राज्य इनोवेशन काउंसिल, यूपीटीयू और शासन के अधिकारियों के बीच एक बैठक होगी।
जिसमें इस मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी। अगर शासन ने हरी झंडी दे दी तो आईईटी देश की पहली इनोवेशन यूनिवर्सिटी होगी।
यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल ने बताया कि सीतापुर रोड स्थित आईईटी को अगर इनोवेशन यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला तो यह देश की पहली अनूठी यूनिवर्सिटी होगी।
अभी तक इंग्लैंड व अन्य पश्चिमी देशों में इनोवेशन यूनिवर्सिटी होती हैं। यहां पर स्टूडेंट्स को इनोवेशन के लिए प्रेरित किया जाता है। वह नए-नए इनोवेशन के लिए रिसर्च करते हैं।
अगर आईईटी को इनोवेशन यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला तो फिर यहां पर सिर्फ पीजी की पढ़ाई होगी और रिसर्च होगी। डॉ. खांडल ने बताया कि यहां पर देश भर से इनोवेटर बुलाए जाएंगे।
यह इनोवेटर यहां पर स्टूडेंट्स को इनोवेशन करने केलिए प्रेरित करेंगे। इस यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए करीब पांच सौ करोड़ रुपए की लागत लगेगी। डॉ. खांडल राज्य इनोवेशन काउंसिल के प्रेसिडेंट भी हैं।
उन्होंने कहा कि अगर इस पर सहमति मिलती है तो प्रदेश के लिए काफी अच्छा रहेगा। यूपी का नाम देश ही नहीं विदेशों में भी इनोवेशन के लिए होगा।
स्टूडेंट्स भी पढ़ाई केसाथ-साथ शोध की ओर अपना रुझान बढ़ाएंगे। देश में होने वाले इनोवेशन का फायदा आम लोगों को होगा।