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हजारों स्टूडेंट्स के रुके प्रवेश पत्र

Fri, 16 May 2014 07:11 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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इंजीनियरिंग कॉलेजों की लापरवाही से स्टूडेंट्स का कॅरिअर दांव पर लगा है। 17 मई से बीटेक के सम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं और सैकड़ों छात्रों का प्रवेश पत्र रुका है।
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10 इंजीनियरिंग कॉलेजों ने नामांकन व परीक्षा शुल्क जमा नहीं किया है, इसलिए कई स्टूडेंट्स के प्रवेश पत्र रोक दिए गए हैं। इसमें दो इंजीनियरिंग कॉलेज राजधानी के भी हैं।

यूपीटीयू प्रशासन का कहना है कि 10 इंजीनियरिंग कॉलेजों ने नामांकन शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क आदि जमा नहीं किया है। ऐसे में इनके स्टूडेंट्स को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जा सकता।
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इसके लिए परीक्षा विभाग की ओर से कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है लेकिन कॉलेज प्रशासन ने कोई जवाब तक नहीं दिया। अब फीस जमा करने की अंतिम तारीख बीत चुकी है।

तो यूनिवर्सिटी प्रशासन अब वित्त विभाग की राय लेकर ही आगे कोई कार्रवाई करेगा। फिलहाल, अब परीक्षा शुरू होने में सिर्फ एक दिन बचा है ऐसे में स्टूडेंट्स अपने कॅरिअर को लेकर काफी चिंतित हैं।

फीस वसूली के विरोध में हंगामा
उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) में गुुरुवार को बड़ी संख्या में विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के स्टूडेंट न्याय मांगने पहुंचे। यहां पर आए स्टूडेंट्स का कहना था कि उनका दाखिला कॉलेज में जीरो फीस पर हुआ था।

कॉलेजों ने इन्हें एमबीए व बीटेक कोर्सेज में बीते सेमेस्टरों में पढ़ाई करवाई अब अंतिम सेमेस्टर में वह पहले नकद फीस जमा करने फिर उसके बाद ही प्रवेश पत्र देने की धमकी दी है।

यूनिवर्सिटी में पहुंचे इन स्टूडेंट को अधिकारियों से मिलने नहीं दिया गया। उन्हें बैठक का बहाना बनाकर रोक लिया गया। स्टूडेंट्स का कहना है कि अगर उन्हें न्याय न मिला तो वह सड़क पर उतरेंगे।

यूनिवर्सिटी प्रशासन उन्हें मैनेजमेंट कोटे का बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है। ऐसे में हम इस मामले की शिकायत राज्यपाल व मुख्यमंत्री से करेंगे।

4,500 स्टूडेंट्स के प्रवेश पत्र रोके
यूपीटीयू ने उन 44 इंजीनियरिंग कॉलेजों जिन्होंने संबद्धता के लिए निर्धारित तारीख बीत जाने के बाद आवेदन किया था, उनके 4,500 स्टूडेंट्स के सेकंड सेमेस्टर का प्रवेश पत्र अभी रोक लिया गया है।

फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन इन स्टूडेंट्स को सेमेस्टर परीक्षा में बैठाए जाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले पा रही है।

इस मामले में अब लीगल ओपिनियन लिया जा रहा है और इस पर कल अंतिम फैसला हो सकता है। अभी न्यायालय में वाद विचाराधीन होने के कारण स्टूडेंट्स को सेकंड सेमेस्टर में बैठने की अनुमति मिल सकती है।
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