उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से पहली बार नए पैटर्न के साथ आयोजित की गई पीसीएस परीक्षा में सीसैट के प्रश्न पत्र ने पसीने छुड़ा दिए।
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खासतौर से आर्ट्स और सामान्य बैकग्राउंड वाले अभ्यर्थियों के लिए सीसैट पैटर्न मुसीबत साबित होगा। हालांकि परीक्षा में पहला प्रश्न पत्र अपेक्षाकृत आसान रहा। परीक्षा में कुल 19170 अभ्यर्थी शामिल हुए।
पीसीएस परीक्षा के लिए देहरादून, ऋषिकेश और विकासनगर में कुल 63 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इनमें 28778 अभ्यर्थियों को परीक्षा देनी थी। प्रथम पाली में 19639 उपस्थित और 9139 अनुपस्थित रहे।
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द्वितीय पाली में 469 अभ्यर्थियों ने परीक्षा से किनारा कर लिया। सीसैट परीक्षा वाले द्वितीय प्रश्न पत्र में 19170 अभ्यर्थी उपस्थित और 9608 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
प्रथम प्रश्न पत्र में कुल 150 सवाल पूछे गए जबकि द्वितीय सीसैट प्रश्न पत्र में 100 प्रश्न पूछे गए थे। प्रथम प्रश्न पत्र में गत वर्षों जैसा ही सरलता का स्तर रहा। इसमें 25 सवाल उत्तराखंड, 25 करेंट अफेयर्स के पूछे गए।
इसके अलावा करीब 23 सवाल भारतीय संविधान, 15 इतिहास, दस भूगोल, दस अर्थशास्त्र, दस विज्ञान, पांच कंप्यूटर और बाकी पर्यावरण व सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे गए थे। अभ्यर्थियों का कहना था कि इसमें कठिनता का स्तर सामान्य था। द्वितीय प्रश्न पत्र अभ्यर्थियों पर भारी साबित हुआ।
डिसीजन मेकिंग हुई गायब
द्वितीय प्रश्न पत्र में अंग्रेजी के सात और हिंदी के सवाल भी कुल मिलाकर 30 थे, लेकिन डिसीजन मेकिंग के सवालों की संख्या बेहद कम रही। चार सवालों को छोड़कर बाकी 60 सवाल मैथ्स रीजनिंग के पूछे गए। इससे आर्ट्स बैकग्राउंड वाले अभ्यर्थियों को मुसीबत हुई।
अभ्यर्थियों का कहना था कि प्रशासनिक सेवा के लिए अफसर चुनने में गणित के सवालों से ज्यादा डिसीजन मेकिंग को अहमियत दी जानी चाहिए लेकिन इसके उलट ही हुआ है। मैथ्स रीजनिंग के ज्यादा सवाल आने से एसएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले और इंजीनियरिंग के छात्रों को ज्यादा लाभ होगा।
प्रयाग आईएएस एकेडमी के निदेशक आरए खान ने बताया कि गत वर्षों की तुलना में पेपर थोड़ा अलग था। संघ लोक सेवा आयोग की नकल करने के चक्कर में पेपर से भटक गए और मैथ्स बैकग्राउंड वाले अभ्यर्थियों के लिए लाभकारी होगा। द्वितीय प्रश्न पत्र में ऑफिसर का एटीट्यूड होने के बजाए बैंकिंग वाला सार था।
इतने अंक वालों का हो सकता है चयन प्रयास आईएएस स्टडी सर्किल के निदेशक सुशील कुमार सिंह के मुताबिक जिस अभ्यर्थी ने प्रथम प्रश्नपत्र में 90 से 100 सवाल और द्वितीय सीसैट प्रश्न पत्र में 50 से 55 सवाल एक्यूरेट सही किए होंगे, उनके लिए परीक्षा की राह आसान हो जाएगी और मुख्य परीक्षा के लिए चयन हो सकता है।
अफवाहों से हुए परेशान पीसीएस परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही रुड़की में पेपर लीक होने की अफवाह फैलने लगी। 12 बजे प्रथम पाली की परीक्षा खत्म हुई तो अभ्यर्थियों के बीच इसकी चर्चा होती रही। कई अभ्यर्थी मामले से काफी चिंतित नजर आए। कुछ को यह भी डर था कि कहीं इतनी मेहनत के बाद परीक्षा रद्द न हो जाए।
कई राज्यों के युवा पहुंचे दून रविवार को पीसीएस के अलावा रेलवे ग्रुप डी और एसबीआई बैंक पीओ की परीक्षा भी होनी थी। इन परीक्षाओं के लिए उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश तक के युवा दून पहुंचे थे।
शनिवार शाम को ही अभ्यर्थी यहां पहुंच गए थे। लखनऊ, बरेली, सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर आदि के ज्यादा अभ्यर्थी दून पहुंचे। रेलवे की परीक्षा में सात हजार अभ्यर्थी शामिल हुए।
लोक सेवा आयोग की एक चूक से हजारों अभ्यर्थी परेशान रहे। इसका कारण उपस्थिति पत्रक (अटेंडेंस सीट) में सात की बजाए छह कालम दिए जाना था। रविवार को आयोजित पीसीएस की प्री-परीक्षा विभिन्न केंद्रों पर कराई गई।
पेपर मिलने और उपस्थिति पत्रक में इसका नंबर भरने के लिए अभ्यर्थियों को माथापच्ची करनी पड़ी। दरअसल, पेपर और उत्तर पुस्तिका का सीरियल नंबर सात अंकों का था जबकि अटेंडेंस सीट पर इसके लिए छह कालम ही दिए गए थे।
जब अभ्यर्थियों ने इसकी शिकायत कक्ष निरीक्षकों से की तो केंद्र व्यवस्थापक हरकत में आए। उन्होंने इस बारे में आयोग के कार्यालय में संपर्क साधा। सूचना से आयोग कार्यालय में मौजूद अधिकारियों में हलचल पैदा हो गई। इसके कुछ देर बाद आयोग ने सभी सेंटरों में सीरियल नंबर का शुरूआती अंक छोड़कर बाकी अंकों को इसमें दर्ज करने के निर्देश दिए।
हिंदी वालों पर भारी पड़ेगा एक सवाल हिंदी माध्यम से पीसीएस परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को एक सवाल जोर का झटका दे सकता है। दरअसल, यह गलती हिंदी और अंग्रेजी के सवालों को देखकर पकड़ में आई है। अंग्रेजी में तो वह सवाल और उसके विकल्प सही थे लेकिन हिंदी में यह गलत है, जिससे अभ्यर्थी को एक अंक का नुकसान हो सकता है।
रविवार को प्रथम पाली में सामान्य अध्ययन की परीक्षा हुई। इसमें कुल 150 सवाल पूछे गए थे। प्रश्न पत्र में एक सवाल था कि ‘निमभन में से किस की नियुक्ति राज्य का राज्यपाल नहीं करता है’।
अंग्रेजी में चार इसके विकल्प थे, चीफ मिनिस्टर, मेंबर स्टेट पब्लिक सर्विस, जजेज आफ हाईकोर्ट और एडवोकेड जनरल। हिंदी विकल्प वाले छात्रों के लिए प्रश्नपत्र का अनुवाद हुआ तो एडवोकेट जनरल को महाधिवक्ता के बजाय महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) लिख दिया गया।
इस वजह से अभ्यर्थी असमंजस में पड़ गए। हिंदी वाले सवाल में उनके पास दो सही विकल्प बन गए, एक तो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और दूसरा महान्यायवादी। दरअसल यह दोनों नियुक्तियां राष्ट्रपति करते हैं।
कुछ अभ्यर्थियों ने न्यायाधीश वाला विकल्प भरा है तो कुछ ने महान्यायवादी। अब अभ्यर्थियों ने मांग की है कि हिंदी माध्यम से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को इस सवाल में छूट दी जाए।