विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों से शोध, डिग्री और पेटेंट आदि की जानकारी मांगी है।
यूजीसी ने साफ किया है कि इस आधार पर ही तय किया जाएगा कि किस विश्वविद्यालय को कितना और किस काम के लिए फंड दिया जाएगा। यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालयों को जारी सर्कुलर के मुताबिक विश्वविद्यालयों को एक परफॉर्मा भरना होगा।
इसमें आवंटित अनुदान, खर्च हुआ अनुदान, प्रकाशित शोध पत्र, पीएचडी और एमफिल की डिग्रियों की संख्या, 12वीं योजना के दौरान जमा किए पेटेंट्स और स्वीकृत हुए पेटेंट्स की संख्या आदि को दर्ज करना होगा। यूजीसी ने इसके लिए एक एक्सपर्ट कमेटी गठित की है।
कमेटी विभिन्न रिसर्च स्कीमों के तहत फंड के वितरण के सुझाव देगी। इसके पीछे यूजीसी का मकसद यह है कि विश्वविद्यालय शोध को बढ़ावा दें और आगे आकर काम करें, ताकि उच्च शिक्षा का स्तर उठ सके।
श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यूएस रावत ने बताया कि यूजीसी के निर्देशों के मुताबिक परफॉर्मा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका मकसद विवि के अच्छे शैक्षिक माहौल और बेहतर शोध के लिए यूजीसी से ज्यादा से ज्यादा ग्रांट हासिल करना है।