प्रयोगात्मक परीक्षाओं में जीवों के उपयोग पर यूजीसी ने रोक लगाते हुए इसका अल्टरनेट डिजिटल विकल्प सुझाया है। इसके लिए टीम का गठन किया गया है।
इसमें एक्सपर्ट कमेटी ने पढ़ाई को प्रभावित किए बिना जीवों के संरक्षण के उपाय सुझाए हैं।
जूलॉजी की पढ़ाई के दौरान जीवों का प्रयोग होता है। इसलिए जूलॉजी के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव करने की सिफारिश भी यूजीसी ने की है।
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972, प्रिवेंशन ऑफ क्रूयल्टी टू एनिमल एक्ट 1960 में जीवों को मारने पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद विभिन्न विश्वविद्यालयों में यूजीसी की ओर से मान्य जूलॉजी के पाठ्यक्रम में जीवों की चीर-फाड़ शामिल है।
विभिन्न संगठनों की ओर से इसकेे खिलाफ आवाज उठाने पर जूलॉजी के प्रैक्टिकल में डाइसेक्शन पर रोक लगा दी गई। इस रोक का पढ़ाई पर बुरा असर न पड़े, इसलिए यूजीसी ने इस संबंध में कमेटी का गठन किया था।
एक्सपर्ट कमेटी ने अपने सुझाव दे दिए हैं। समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में दो प्रकार की सिफारिशें की हैं। पहली जिनका पालन तुरंत किया जाना है, दूसरी जो थोड़े समय बाद व्यवहार में आनी हैं।
इमिडिएट एक्शन के रूप में सुझाई गई सिफारिशों में सभी उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर से पालन किया जाना है। साथ ही सभी संस्थान अपने यहां डाइसेक्शन मॉनीटरिंग कमेटी का गठन करें।
एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों को यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य किया है। एक्सपर्ट कमेटी ने जूलॉजी के प्रैक्टिकल के दौरान जीवों के प्रयोग और चीरफाड़ पर रोक लगाई है।
इसके स्थान पर डिजिटल उपकरणों का प्रयोग किया जाना है। समिति ने विश्वस्तर पर उपलब्ध डिजिटल विकल्पों के साथ ही भारत में भी कुछ सॉफ्टवेयर और उपकरण विकसित करने पर जोर दिया है।
यूजीसी इस तरह से विकसित डिजिटल विकल्पों को इंफ्लिबनेट के जरिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को मुफ्त उपलब्ध कराएगा। डिजिटल विकल्पों के उपयोग के लिए यूजीसी ने कार्यशालाएं करने के लिए भी कहा है।
इसके माध्यम से शिक्षकों को इस योग्य बनाया जाएगा कि वे डिजिटल विकल्पों का प्रयोग कर सकें और जीवों को संरक्षित किया जा सके।
एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों के अनुसार यूजी कक्षाओं में स्टूडेंट्स के डाइसेक्शन पर रोक लगाई गई है। इसके स्थान पर टीचर्स स्टूडेंट्स को डाइसेक्शन करके दिखाएंगे। स्टूडेंट्स इसे रिकॉर्ड कर सकते हैं।
एग्जाम में जरूरी होने पर स्टूडेंट्स की नॉलेज स्पेसीमेन के जरिए परखी जानी है। पढ़ाई के दौरान म्यूजियम के प्रयोग की बात भी कही गई है।
इसी तरह परास्नातक स्तर के स्टूडेंट्स को डाइसेक्शन और प्रोजेक्ट के बीच एक विकल्प चुनने का मौका देने के लिए कहा गया है। पीजी स्टूडेंट्स को कंप्यूटर के माध्यम से जानवरों की फिजियोलॉजी समझने का सुझाव दिया गया है।