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जब एमबीए से स्टूडेंट्स का मोहभंग तब घटाई फीस

Mon, 24 Feb 2014 09:24 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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राजधानी की यूनिवर्सिटीज में एमबीए कोर्सेज की दशा काफी खराब है। सभी यूनिवर्सिटीज में फीस ज्यादा है लेकिन प्लेसमेंट की सुविधा अच्छी नहीं है।
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अब जब एमबीए कोर्सेज में छात्रों का मोह भंग होने लगा तो विश्वविद्यालयों की आंखे खुली हैं। कोई फीस घटाकर स्टूडेंट्स को लुभाने में जुटा है तो कोई प्लेसमेंट सेल को मजबूत बनाने की बात कहकर स्टूडेंट्स को आकर्षित कर रहा है।

कुछ विवि तो जॉइंट वेंचर्स के जरिए आपस में मिलकर प्लेसमेंट की व्यवस्था कर रहे हैं। इसका मकसद अधिक से अधिक सीटें भरना हैं। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में एमबीए के छह कोर्सेज के प्रति स्टूडेंट्स का रुझान कम दिखा।
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इस पर विभाग ने 75 हजार रुपये के प्रति सेमेस्टर की फीस घटाने व प्लेसमेंट मजबूत बनाने के लिए फैकल्टी की एक टीम गठित कर दी। वहीं लविवि में एमबीए के 11 में नौ कोर्सेज ही चल रहे हैं।

यहां एमबीए एग्री बिजनेस जैसा अच्छा कोर्स बंद हो गया। बीते साल कैट के जरिए सीटें भरने में एलयू नाकाम रहा तो ओपन टेस्ट कराकर सीटें भर सकीं।

कारण यहां भी फीस 56 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर है और प्लेसमेंट भी अच्छा नहीं है। अब एलयू भी अधिक से अधिक दाखिलों के लिए प्लेसमेंट मजबूत करने में लगा है।

कुछ ऐसा ही हाल उप्र विकलां उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी का है। यहां एमबीए की कुल 120 सीटों में से मात्र 28 सीटें ही भर पाईं थीं। यहां फीस 58 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर है।

निशक्त बच्चों से 25 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस ली जाती है। ऐसे में अब यूनिवर्सिटी आगे फीस घटाने पर तो विचार करेगी ही बल्कि वह प्लेसमेंट के लिए ज्वाइंट वर्क करने जा रही है।

वह एलयू के साथ जुड़कर मेगा जॉब फेयर लगाएगी। यही नहीं, अब हावर्ड यूनिवर्सिटी की तरह यहां भी स्टूडेंट्स को केस स्ट्डी के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। यह एमबीए कोर्स में अनिवार्य होगा।

वहीं बीते साल शुरू हुई ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में एमबीए की 60 सीटों में केवल सात ने ही एडमिशन लिया था। यहां भी प्रति सेमेस्टर 40 हजार रुपये फीस ली जा रही है।

कहां कौन से पाठ्यक्रम
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में एमबीए प्योर कोर्स चलता है। यहां सेकंड सेमेस्टर में ह्यूमन रिसोर्स, फाइनेंस आदि में विशेषज्ञता दिलाई जाती है।

उप्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी में एमबीए मार्केटिंग, एमबीए फाइनेंस व एमबीए ह्यूमन रिसोर्स का कोर्स चलाया जा रहा है।

बीबीएयू में एमबीए ह्यूमन रिसोर्स, एमबीए मार्केटिंग मैनेजमेंट, एमबीए मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट, एमबीए रूरल मैनेजमेंट, एमबीए टूरिज्म मैनेजमेंट, एमबीए एग्जीक्यूटिव मैनेजमेंट शामिल हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय में एमबीए एचआर एंड आईआर, एमबीए कारपोरेट मैनेजमेंट, एमबीए फाइनेंस एंड कंट्रोल, एमबीए इंटनेशनल बिजनेस, एमबीए मार्केटिंग, एमबीए मैनेजमेंट साइंस, एमबीए रिटेल मैनेजमेंट, एमबीए सेल्फ फाइनेंस। एलयू में प्रत्येक कोर्स में 60-60 सीटें हैं।

बीबीएयू के प्रवक्ता डॉ. गोविन्द जी पांडेय ने बताया कि एमबीए के कोर्सेज अच्छे ढंग से चलें। इसके लिए हम पूरी मेहनत कर रहे हैं। कोर्स की फीस घटाने के प्रस्ताव पर तो आगे विचार किया ही जाएगा।

हम इसके अलावा कोर्स में प्लेसमेंट की सुविधा को बेहतर बनाएंगे। बीबीएयू इसके लिए मजबूत प्लेसमेंट सेल बनाने के साथ-साथ विभाग में एक शिक्षक व दो छात्रों को इस काम का जिम्मा देगी। अप्रैल में मेगा जॉब फेयर भी आयोजित किया जाएगा।

डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक्स प्रो. एपी तिवारी ने बताया प्लेसमेंट मजबूत करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के साथ मिलकर ज्वाइंट वेंचर चलाएंगे।

अच्छी कंपनियों को बुलाकर स्टूडेंट्स का हम कैंपस सलेक्शन करवाएंगे। अभी कोर्स अच्छे ढंग से चले इसके लिए हम स्टूडेंट्स को इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स और हावर्ड यूनिवर्सिटी की तरह केस स्ट्डी केमाध्यम से पढ़ाएंगे। दूसरी यूनिवर्सिटी की तर्ज पर फीस घटाने पर भी विचार होगा।

ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सैय्यद हैदर ने बताया कि एमबीए कोर्सेज की दशा राजधानी में पहले से ही खराब चल रही है।
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यही कारण था कि हमारे यहां पहले सत्र में केवल सात दाखिले ही हो पाए लेकिन क्वॉलिटी से समझौता नहीं किया। उम्मीद है कि कोर्स अच्छे से चलेंगे। हम किसी भी तरह से कोई समझौता नहीं करेंगे। यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स के प्लेसमेंट को लेकर पूरी तरह संजीदा है।
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