माध्यमिक शिक्षा परिषद के राजकीय व सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा में ट्रेड विषयों में पढ़ाई की अनिवार्यता न रखने पर सहमति बन गई है।
पहले किसी एक ट्रेड को अनिवार्य रूप से छात्रों को लेने की अनिवार्यता करने का विचार था। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को इस संबंध में प्रस्ताव भेज दिया है।
निदेशालय ने तर्क दिया है कि ट्रेड विषयों को अनिवार्य किए जाने से छात्रों पर पढ़ाई का बोझ बढ़ जाएगा जिससे उनके शैक्षिक कैरियर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
राजकीय व सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में कला वर्ग, विज्ञान वर्ग, वाणिज्य वर्ग या कृषि वर्ग के छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा के किसी ट्रेड को विषय के रूप में अनिवार्य करने पर मंथन शासन स्तर पर चल रहा था।
उच्चाधिकारियों की बैठक में इस पर लगभग सहमति भी बन चुकी थी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से इस संबंध में स्पष्ट प्रस्ताव मांगा गया था। इसमें पूछा गया था कि यदि व्यावसायिक शिक्षा के किसी ट्रेड को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल कर दिया जाएगा तो कैसा रहेगा।
इसके आधार पर ही माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को प्रस्ताव भेजते हुए इसकी अनिवार्यता को खारिज किया है।