प्रशिक्षण की अवधि छह माह और पूरा करने का समय केवल तीन महीने। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षार्थियों और अनुदेशकों को ऐसी ही दिक्कतों से गुजरना पड़ रहा है।
आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) में सुधार के तहत पहली बार सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई है। हालांकि आईटीआई का सत्र अगस्त माह से शुरू हो जाता है।
लेकिन यहां अभी तक एडमिशन प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है। अब तीन महीने में पढ़ाई कैसे पूरी होगी इसका
जवाब किसी के पास नहीं है।
आईटीआई में सुधार के लिए इस साल कई कदम उठाए गए हैं। इसी के तहत वार्षिक के बजाय सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई है। दो साल के औद्योगिक प्रशिक्षण में प्रशिक्षार्थियों को चार बार परीक्षा देनी होगी।
परीक्षा हर छह माह के अंतराल पर होनी है। आईटीआई का नया सत्र हर साल अगस्त माह से शुरू होता है। पिछले वर्षों तक अगस्त माह की समाप्ति तक एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो जाती थी।
साल समाप्त होते-होते कोर्स भी पूरा करा लिया जाता था। लेकिन इस बार नया सत्र शुरू हुए दो महीने से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अभी तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए एडमिशन प्रक्रिया खत्म होते-होते पूरा अक्टूबर बीत जाएगा। छह माह के सेमेस्टर में तीन महीने खत्म हो चुके होंगे। इसके बाद फर्स्ट इयर के बच्चों का प्रशिक्षण शुरू होगा।
अगले तीन महीने में नए स्टूडेंट्स का प्रशिक्षण और परीक्षा दोनों होनी हैं। अब अगर फर्स्ट सेमेस्टर लेट होगा तो आने वाले बाकी सेमेस्टर भी लेट होते जाएंगे।
प्रशिक्षण से जुड़े अधिकारी भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं कि इतने कम समय में पढ़ाई पूरी करवाना बड़ी चुनौती होगी।
फर्जी वाड़ा रोकने की कवायद
डीजीईटी (डायरेक्ट्रेट जनरल इंप्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग) से जुड़े अधिकारियों के अनुसार सेमेस्टर प्रणाली लागू होने से प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ ही फर्जीवाड़ा रोकने में भी मदद मिलेगी।
अभी तक दो वर्षीय डिप्लोमा में दो बार और एक वर्षीय डिप्लोमा एक बार वार्षिक परीक्षा होती थी। परीक्षा से ठीक पहले फर्जी अभ्यर्थियों के शामिल होने की शिकायतें आती रही हैं।
नई प्रणाली में पहले सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी ही अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा दे पाएंगे। इस तरह परीक्षा से ठीक पहले शामिल होने वाले अभ्यर्थियों पर रोक लग जाएगी।