मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून (आरटीई) के कारण शैक्षणिक सत्र 2014-15 में लगभग 800 स्कूलों पर बंदी की तलवार फिर से लटक गई है।
शिक्षा निदेशालय ने विभिन्न इलाकों में चल रहे निजी स्कूलों को मान्यता लेने के लिए 15 फरवरी तक आखिरी मौका दिया है।
पब्लिक नोटिस जारी कर अतिरिक्त शिक्षा निदेशक मधु रानी तेवतिया ने कहा है कि इन स्कूलों को पहले ही दो अवसर दिए जा चुके हैं। स्कूल निर्धारित तिथि तक मान्यता लेने के लिए आवेदन कर दें।
ऐसा नहीं करने पर आरटीई के प्रावधानों के मुताबिक दंडित किया जाएगा। अगर स्कूल 15 तक प्रक्रिया शुरू नहीं करते तो अप्रैल से आरंभ होने वाले नए सत्र से नहीं चला सकेंगे।
वहीं दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने कहा कि लगभग 1200-1300 स्कूल ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं, जबकि 400 से 600 स्कूल अलग-अलग इलाकों में 50 से लेकर 180 गज में चल रहे हैं।
जिसमें पढ़ने वालों की संख्या एक लाख से ऊपर बताई जा रही है। जमीन के स्तर पर राहत नहीं मिलने के कारण ही उन पर बंद होने का साया मंडरा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह विभिन्न इलाकों में चल रहे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए राहत का मार्ग तलाशें।
उल्लेखनीय है कि निदेशालय ने वर्ष 2013 मार्च में आरटीई के तहत दिल्ली के अधिकृत, गैर अधिकृत और लाल डोरा इलाकों में चल रहे स्कूलों के लिए मान्यता लेना जरूरी किया था। इसके लिए 800 वर्ग मीटर भूमि की अनिवार्यता भी की थी।
जिससे अनुमानत: 2250 स्कूल प्रभावित हो रहे थे। लिहाजा सरकार 200 गज में चलने वाले स्कूलों को भी मान्यता के तहत ले आई। इसके बाद 1200-1300 स्कूलों ने प्रक्रिया शुरू की। मान्यता न लेने वाले स्कूलों के खिलाफ निदेशालय एक बार फिर सख्त हुआ है।