माध्यमिक स्कूलों के हजारों विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति आवेदन गलत ढंग से संदिग्ध श्रेणी में रख दिए गए हैं। दरअसल यूपी बोर्ड से पंजीकरण संख्या मिलने के पहले ही जांच पूरी कर ली गई।
नतीजतन, बोर्ड के रिकॉर्ड में इन छात्रों का पंजीकरण न पाए जाने पर उन्हें संदिग्ध मान लिया गया। पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक पुष्पा सिंह का कहना है कि इस तरह के मामले उनकी जानकारी में आए हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
वर्ष 2015-16 में छात्रवृत्ति के लिए कक्षा-11 और 12 के6.04 लाख छात्रों के आवेदन जिलों से अग्रसारित किए गए। इनमें से 2.74 लाख छात्रों को संदिग्ध श्रेणी में रख दिया गया है।
इसी तरह से कक्षा-9 और 10 के 4.64 लाख छात्रों के आवेदन अग्रसारित किए गए। इनमें से महज 87894 छात्रों को ही पात्र माना गया, बाकी छात्रों के आवेदन संदिग्ध श्रेणी में रख दिए गए।