शिक्षा में धार्मिक और राजनीतिक दखल से समाज को नुकसान उठाना पड़ता है। इससे शैक्षणिक प्रणाली अपने लक्ष्य से भटक जाती है। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में ‘हायर एजूकेशन इन पंजाब-अचीवमेंट एंड चैलेंजिज’ विषय पर आयोजित पैनल डिस्कशन में यह बात सामने आई।
इंटरनेशनल सेंटर फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट के अंतरिम निदेशक प्रो. पीटर रोनाल्ड डिसूजा ने कहा कि शिक्षा का विकास सिर्फ नए विचारों को क्रियाशील करने पर ही हो सकता है।
डिसूजा ने कहा कि जब तक ग्रास रूट लेवल से शिक्षा प्रणाली को बेहतर नहीं बनाया जाएगा, तब तक अच्छे परिणामों की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी स्तर पर पढ़ाने के तरीके में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है।
शिक्षा को दुकानदारी न बनने दें: प्रो.जयरुप सिंह
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब के कुलपति प्रो. जयरुप सिंह ने कहा कि शिक्षा के निजीकरण से सकारात्मक बदलाव संभव नहीं हैं। शिक्षा अब मुनाफा कमाने का जरिया बन गया है।
क्वालिटी एजूकेशन के लिए हर शिक्षक को अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे। उच्च शिक्षा के लिए संस्थानों को स्वायत्तता देनी होगी ताकि जल्द फैसले लिए जा सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अगर उन्हें सुविधाएं दी जाएंगी तो काम भी करना होगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने यूनिवर्सिटी में बाटोमैट्रिक सिस्टम शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी को 35 फीसदी ग्रांट संबंधित राज्य सरकार और बाकी 65 केंद्र सरकार से मिलेगी। राज्य सरकारें अपने हिस्सा का पैसा ही नहीं देती, ऐसे में इसका लाभ मिलना आसान नहीं है।