कॉलेजों में कॉमर्स और साइंस के आगे आर्ट्स की चमक फीकी पड़ने लगी है। आर्ट्स विषयों के प्रति छात्रों का रुझान घट रहा है। इसी का नतीजा है कि साइंस और कॉमर्स में हाई कटऑफ के बाद भी दो मेरिट में ही सीटें फुल हो गई थी।
लेकिन आर्ट्स के जनरल और ऑनर्स विषयों के लिए अब तक कॉलेजों में आवेदन के लिए पोर्टल खुले हुए हैं। बीते सालों में आर्ट्स के एक-दो विषयों को छोड़ दें तो अधिकतर में सीटें खाली रह जाती हैं।
कॉलेजों में बीए इतिहास, राजनीतिशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, हिन्दी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में भी छात्र नहीं मिल रहे हैं जबकि तीसरी कटऑफ अपने सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है।
शिक्षाविदें की मानें तो इसके पीछे छात्रों की मानसिकता है, जो स्कूली स्तर पर अभिभावकों द्वारा तैयार कर दी जाती है।