उत्तराखंड तकनीकी विवि की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन प्रणाली सवालों के घेरे में है। छात्रों ने जब आरटीआई से अपनी उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त कीं तो पता चला कि बेहद लापरवाही से कापियां चेक हुईं हैं।
पढ़ें, भारत के आगे झुक गया पाकिस्तान का 'शीश'
वह भी तब, जब विवि ने हाल ही में केंद्रीयकृत मूल्यांकन प्रणाली लागू की है। एमबीए के कुछ छात्रों के अंक अपेक्षा से काफी कम आए। छात्रों ने विवि में सूचना के अधिकार में अपनी उत्तर पुस्तिकाएं मांगी।
आंसर शीट देखकर उनके होश उड़ गए। पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बेहद लापरवाही से किया गया था। एक छात्र की कॉपी में परीक्षक ने उत्तर पर अंक तो दिए, लेकिन बाहर मुख्य पृष्ठ पर उन्हें नहीं लिखा।
पढ़ें, कांग्रेस को मिला एक और मजबूत हाथ का साथ
इस वजह से छात्र को 27 के बजाए 22 अंक मिले। एक अन्य के साथ अजब वाकया पेश आया। प्रश्न पत्र में उनके सवाल पर तीन अंक निर्धारित हैं, लेकिन परीक्षक ने इसके जवाब पर आठ अंक कॉपी में लिख दिए।
इससे भी बड़ी लापरवाही यह रही कि मुख्य पृष्ठ पर अंक चार चढ़ाए गए। छात्र परेशान हैं कि इस सवाल के अंक कितने माने।
पढ़ें, देहरादून पुलिस ने लिखी एक और 'खून' की कहानी
एक छात्र की कॉपी को परीक्षक ने बढ़िया तरीके से चेक किया है, लेकिन एक ग्राफ वाले सवाल को पूरा जांचने के बावजूद उस पर एक भी अंक नहीं दिया है।
इस संबंध में विवि के कुलसचिव अवनीश जैन से छात्रों ने कई बार मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने मिलने से साफ इंकार कर दिया। छात्रों ने बताया कि कुलसचिव ने उन्हें यह भी कहा है कि इस गलती का विवि के पास कोई ठेका नहीं है।
रिचेकिंग के पांच हजार
तकनीकी विवि ने कॉपी की रिचेकिंग के पांच हजार रुपये प्रति विषय शुल्क निर्धारित किया हुआ है। ऐसे में छात्र परेशान इसलिए भी हैं कि परीक्षक की गलती का खामियाजा उन्हें पांच हजार रुपये के तौर पर भुगतना पड़ेगा।
पढ़ें, जीत के लिए 'माओवादियों' की शरण में नेताजी
यदि विवि के परीक्षक की गलती की वजह से छात्रों को नुकसान हुआ है तो उनसे रिचेकिंग का शुल्क नहीं लिया जाएगा। वह छात्र विवि में आकर अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाएं और विवि स्तर पर उनकी कमियों को दूर किया जाएगा।
- प्रो. वीके जैन, कुलपति, यूटीयू