लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षक और छात्र-छात्राओं के संबंध केवल क्लास रूम तक ही सीमित नहीं होंगे। कक्षाओं के बाद कम से कम एक घंटा शिक्षकों को विभाग में रुकना होगा।
इस दौरान टीचर्स स्टूडेंट से मुखातिब होंगे। बीते दिनों लविवि में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यूजीसी रेग्युलेशन-2013 को स्वीकारने पर सहमति बनने के बाद नई व्यवस्था लागू हो चुकी है। इस पर अमल कराने का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा।
शिक्षक और स्टूडेंट्स के बीच मधुर संबंध होने पर बेहतर शिक्षा मिलेगी। इस मकसद से यूजीसी रेग्युलेशन-2013 में कई प्रावधान किए गए हैं। इनमें से एक गुरुजी और विद्यार्थियों के बीच बेहतर संबंध बनाने का भी है।
क्लास रूम टीचिंग केे बाद टीचर अपने स्टूडेंट्स को एक घंटे का अतिरिक्त समय देंगे। इस दौरान स्टूडेंट्स शिक्षकों से मार्गदर्शन लेंगे।
यूजीसी की ये पहल स्टूडेंट्स की ओर से टीचर्स का फीडबैक फॉर्म भरने की व्यवस्था में भी लाभदायक है। टीचर्स के प्रमोशन में स्टूडेंट्स फीडबैक को ध्यान में रखा जाएगा।
ऐसे में टीचर्स और स्टूडेंट्स के बेहतर संबंध का असर फीडबैक फॉर्म पर भी नजर आएगा। टीचर्स को स्नातक स्टूडेंट्स को अतिरिक्त एक घंटे का समय रोजाना देना होगा।
इसके साथ ही पीएचडी, एमफिल और पीजी के रिसर्च बेस सब्जेक्ट्स वाले स्टूडेंट्स के लिए गुरुजी को सप्ताह में दो घंटे का अतिरिक्त समय निकालना होगा। इससे रिसर्च की क्वॉलिटी सुधरने की उम्मीद बढ़ेगी।
बुधवार को कार्यपरिषद बैठक में यूजीसी रेग्यूलेशन जून-2013 को लागू करने के बाद अतिरिक्त समय देने की व्यवस्था भी लविवि में लागू हो गई है।