गढ़वाल विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक में लागू किया गया सेमेस्टर सिस्टम पढ़ाई का सिस्टम बिगाड़ रहा है। इसका कारण शिक्षकों की कमी है। छात्र जो विषय ले रहे हैं, उनकी फैकल्टी न होने से वह परेशान हैं। उत्तराखंड प्राचार्य परिषद ने इस पर आपत्ति जताते हुए जल्द से जल्द शिक्षकों के भर्ती की मांग की है।
बुधवार को एमकेपी पीजी कॉलेज में उत्तराखंड प्राचार्य परिषद ने अहम बैठक बुलाई। बैठक में फैकल्टी की कमी प्रमुख मुद्दा रही। परिषद के महामंत्री डॉ. ओपी कुलश्रेष्ठ ने बताया कि विवि की ओर से कराई गई बैक परीक्षाओं की मार्कशीट अब तक कॉलेजों को नहीं मिली हैं।
ऐसे में इसी महीने होने वाले सेमेस्टर एग्जाम पर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल विवि ने सीबीसीएस सिस्टम तो लागू कर दिया लेकिन शिक्षकों की कमी पर सरकार ने कोई पहल नहीं की। हिंदी, अंग्रेजी सहित तमाम विषयों की फैकल्टी न होने की वजह से छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
उन्होंने कहा कि आज भी कॉलेजों में 1975 वाले पद ही सृजित हैं। छात्र संख्या और पढ़ाई का बोझ कई गुना अधिक बढ़ने के बाद भी सरकार ने अब तक शिक्षकों के नए पद सृजित नहीं किए हैं। उन्होंने शिक्षकों सहित लाइब्रेरियन के खाली पद भी जल्द भरने की मांग की।
बैठक में गुरुकुल नारसन के प्राचार्य डॉ. बीएल कुशवाहा, एमकेपी की प्राचार्य डॉ. इंदू सिंह, केएल डीएवी के प्राचार्य डॉ. यशोदा, गर्ल्स कॉलेज रुड़की की प्राचार्य डॉ. शालिनी पंत, डीडब्ल्यूटी की प्राचार्य डॉ. आरती दीक्षित, एसजीआरआर पीजी कॉलेज प्राचार्य प्रो. वीए बौड़ाई आदि मौजूद रहे।