सिविल सर्विसेज एग्जाम जैसी प्रतियोगिता में सफलता पाने के लिए रेगुलर स्टडी और कंसेप्ट का क्लीयर होना जरूरी है। यह कहना है सिविल सर्विसेज रिजल्ट में देश में 14वां और चंडीगढ़ में पहला स्थान हासिल करने वाले जीएमसीएच में एमबीबीएस डॉ. विपिन वि ईटनकर का। वह सफलता का श्रेय पत्नी डॉ. शालिनी को देते हैं, वह भी जीएमसीएच-32 में डॉक्टर हैं।
तीन बार सिविल सर्विसेज में असफल होने के बावजूद पत्नी ने उनका हौसला बनाए रखा और उन्हें आखिरी चांस में कामयाबी मिली। उन्होंने बताया उनकी तैयारी में सेक्टर-37 स्थित एसएनएम आईएएस स्टडी ग्रुप के शिक्षकों का विशेष योगदान रहा है। आईएएस में उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब कैडर का ऑप्शन भरा है।
टॉपर ने दिए जीत के मंत्र
-सिविल सर्विसेज में किसी भी युवा की नॉलेज, इंटलेक्चुअल, पर्सनेलिटी और एप्टीट्यूट को परखा जाता है।
-अखबार को रुटीन की हॉबी बना लें।
-कोचिंग से तैयारी में काफी मदद मिलती है।
-प्रतिदिन कोचिंग में पढ़े चैप्टर का रिवीजन बहुत जरूरी है।
-आईएएस के लिए एक साल की तैयारी काफी है।
-सफलता के लिए 60 फीसदी मेहनत और 40 फीसदी लक जरूरी
ड्यूटी के बाद की तैयारी: डॉ. निपुण
जीएमसीएच-32 में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. निपुण ने पहले ही चांस में सिविल सर्विसेज परीक्षा पास कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया लेवल पर 29वीं और चंडीगढ़ में तीसरा स्थान हासिल किया है।
बातचीत में डॉ. निपुण ने बताया पहले चांस में टॉप 100 में आने की उम्मीद नहीं थी। वह अपनी सफलता का श्रेय पत्नी और परिवार को देते हैं।
तैयारी के बारे में उन्होंने बताया कि शाम 6 बजे अस्पताल से आने के बाद ही वह यूपीएससी की तैयारी में जुट जाते थे। उन्होंने बताया कि आईएएस की तैयारी के लिए उन्होंने 6 से 7 महीने हर रोज 7 से 8 घंटे तक रूटीन में पढ़ाई की है।
गांव के लिए कुछ करने का जज्बा: जलज शर्मा
कैरियर को लेकर स्कूल कालेज लेवल से ही फोकस होना जरुरी है। मैने शुरू से ही सिविल सर्विसेज में जाने का मन बना लिया था। यह कहना है सिविल सर्विसेज में 43वां रैंक हासिल करने वाले जलज शर्मा का।
सेक्टर-32 सेंट ऐंस से 10वीं और गवर्नमेंट मॉडल-37 से 12वीं करने वाले जलज ने कुरुक्षेत्र से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है।
2011 सिविल सर्विसेज में इन्होंने 410 रैंक हासिल किया था। उन्होंने कहा कि वह ग्रामीण स्तर पर काम करने की चाहत रखते हैं। उनका कहना है देश में सेनीटेशन का काफी बड़ी दिक्कत है।
प्राइवेट कंपनी का ऑफर ठुकरायाः आंचल सूद
पेक से इलेक्ट्रेकिल एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद आंचल सूद को प्राइवेट कंपनी से 9 लाख का पैकेज मिला। लेकिन उन्होंने तो सिविल सर्विसेज को ही कैरियर चुना।
नागपुर में इनकम टेक्स ऑफिसर आंचल सूद ने सिविल सर्विसेज में 61वां रैंक हासिल किया है। उन्होंने बताया कि सैकेंड ईयर से उन्होंने तैयारी शुरू कर दी थी। बॉस्टकेटबाल की खिलाड़ी आंचल दो बार बेस्ट एथलीट रह चुकी हैं।