इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में साल-दर-साल छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। अब यूपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी के सामने अधिक सीटें भरने के लिए 2014-15 की राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) चुनौती बनी हुई है।
यूपीटीयू ने प्रदेश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के निदेशकों को पत्र भेजकर जवाब मांगा है, जिसमें पूछा गया है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ कि कुछ संस्थानों में कोर्सेज की सीटें भरीं, अन्य में दाखिले कम हुए।
ऐसे कौन से विशेष उपाय हो सकते हैं, जिससे यूपी में अधिक से अधिक इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कोर्सेज की सीटें भर सकें। एसईई-2012 के मुकाबले एसईई-2013 में इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कोर्सेज में दाखिले कम हुए।
इस पर चिंता जताते हुए एसईई-2014 अधिक से अधिक सीटें भरने की तैयारियों पर यूपीटीयू ने जोर दिया है। यूपीटीयू प्रशासन ने सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों को बीते साल हुए दाखिले की विस्तृत रिपोर्ट भी भेजी है।
दरअसल, इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों को बीते वर्षों में दो अलग-अलग यूनिवर्सिटी एमटीयू व जीबीटीयू में बांटने का नतीजा यह हुआ कि गुणवत्ता में गिरावट आ गई।
जबकि एमटीयू ने सेमेस्टर परीक्षा के साथ करवाने और परीक्षा के पैटर्न में भी बदलाव किया, ताकि सुधार किए जा सकें। प्रश्नपत्र में यूनिटों का विभाजन ऐसा किया गया कि अभ्यर्थी परीक्षा तभी पास कर सकता था, जब वह पूरा कोर्स पढ़े।
मगर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा। एमटीयू में वर्ष 2013-14 में 15.71 प्रतिशत सीटें वर्ष 2012 -13 के मुकाबले कम भरीं। वहीं, जीबीटीयू में वर्ष 2013-14 में 1.71 प्रतिशत सीटें वर्ष 2012-13 के मुकाबले कम भर पाईं।
अब जबकि दोनों यूनिवर्सिटी का विलय होकर यूपीटीयू दोबारा अस्तित्व में आ गया है तो उसके सामने पश्चिम व पूर्वी दोनों क्षेत्रों में संतुलन बैठाने की बड़ी चुनौती है।
फिलहाल, यूपीटीयू प्रशासन ने ऑपरेशन एसईई 2014-15 के तहत अभी से काम करना शुरू कर दिया है।
2013-14 में प्रदेश में भरी मात्र 1,20,271 सीटें
एमटीयू में वर्ष 2012-13 में 78,762 सीटें भरीं थीं, वहीं, वर्ष 2013-14 में 66,389 सीटें भरीं, जबकि जीबीटीयू के तहत संचालित कॉलेजों में वर्ष 2012-13 में 54,882 सीटें भरीं और वर्ष 2013-14 में 53,882 सीटें भर पाईं।
अब दोनों यूनिवर्सिटी का आपस में विलय हो गया है। इसके बाद अगर दोनों यूनिवर्सिटी के आंकड़ों को आपस में जोड़ दिया जाए तो दोबारा अस्तित्व में आए यूपीटीयू में सत्र 2012-13 में 1,33,644 सीटें भरीं थी।
वर्ष 2013-14 में 1,20,271 सीटें भर पाईं, जबकि अकेले बीटेक में 1,55,000 सीटें हैं और इसमें एमबीए, एमसीए, बीफॉर्मा, बीऑर्क सहित सभी कोर्सेज की सीटें जोड़ दी जाएं तो यह आंकड़ा 1,94,000 सीटों तक पहुंच जाता है। ऐसे में पूरे प्रदेश में करीब 74 हजार सीटें खाली रह गई हैं।