उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध रहे बंद कॉलेजों के स्टूडेंट्स उसी जनपद के दूसरे कॉलेजों में समायोजित किए जाएंगे। यूपीटीयू ने इसकी तैयारी कर ली है।
प्राविधिक विश्वविद्यालय ने लखनऊ के साथ ही उन्नाव, मथुरा, गोरखपुर और कानपुर जनपदों के कॉलेजों से कोर्सवार खाली सीटों का ब्यौरा मांगा है।
इन जनपदों के कॉलेजों की खाली सीटों पर बंद हुए कॉलेजों के स्टूडेंट्स को दाखिला दिया जाएगा। दाखिले से पहले स्टूडेंट्स से उनकी पसंद के कॉलेज की च्वायस भी मांगी जाएगी।
लखनऊ में सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के साथ ही बीकेटी के फॉर्मेसी कॉलेज ने यूपीटीयू के पास संस्थान बंद करने के लिए आवेदन किया था।
इन कॉलेजों में पढ़ रहे स्टूडेंट्स का भविष्य बर्बाद न हो इसके लिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में शिफ्ट किया जाना है। लखनऊ के साथ ही उन्नाव, मथुरा, गोरखपुर और कानुपर में एक-एक कॉलेज बंद हो रहा है।
यूपीटीयू ने इन सभी जनपदों में स्थित कॉलेजों से उनके यहां स्टूडेंट्स को समायोजित करने के लिए कोर्सवार खाली सीटों का ब्यौरा मांगा है।
खाली सीटों के आधार पर ही कॉलेजों को स्टूडेंट्स आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए स्टूडेंट्स से कॉलेजों की च्वायस मांगी जाएगी।
यूपीटीयू के प्रति कुलपति प्रो. दिवाकर सिंह यादव के अनुसार जब कॉलेज आवेदन कर देंगे तो सीटें भरने के लिए काउंसिलिंग का आयोजन किया जाएगा।
इसमें बंद हो रहे कॉलेज के छात्रों को ही बुलाया जाएगा। छात्रों को यह आजादी दी जाएगी कि वह कौन से कॉलेज में आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं।
कॉलेज कर रहे थे आपस में सौदा
यूपीटीयू द्वारा एडजस्टमेंट करने से पहले कॉलेजों में अपने स्तर से ही स्टूडेंट्स के खरीद-फरोख्त की शुरुआत हो गई थी। सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने बीटेक प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों को लखनऊ के एक निजी विश्वविद्यालय के हाथों बेचा जा रहा था।
निजी विश्वविद्यालय की ओर से स्टूडेंट्स को डेमो भी दिया गया था। स्टूडेंट्स द्वारा इस संबंध में शिकायत करने के बाद कुलपति प्रो. आरके खांडल ने गंभीर रुख अपनाया।
उन्होंने कॉलेज को निर्देश दिया कि स्टूडेंट्स को समायोजित करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय की है। अब उसी पर कार्यवाही की जा रही है।
नहीं कर सकेंगे उगाही
यूपीटीयू की ओर से कड़े निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी सूरत में स्टूडेंट्स से कॉलेज ज्यादा धन की उगाही नहीं कर सकेंगे।
कॉलेजों को जारी निर्देश में साफ कहा गया है कि स्टूडेंट्स ने जितनी फीस पूर्व संस्थान में जमा की होगी उनसे उतनी फीस ही ली जाएगी। इस बारे में शिकायत मिलने पर कॉलेज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।