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एलयू के पीजी कोर्सेज को नहीं मिल रहे स्टूडेंट

Sat, 24 Aug 2013 01:17 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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लखनऊ विश्वविद्यालय समेत अन्य डिग्री कॉलेजों में जहां ग्रेजुएशन कोर्सेज में एडमिशन के लिए मारामारी है, वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज में सीटें भरना तक मुश्किल हो रहा है।
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लविवि में पीजी कोर्सेज की पहली कटऑफ सूची में चुने हुए 2431 अभ्यर्थियों में से 717 ने एडमिशन ही नहीं लिया। 22 अगस्त तक उन्हें फीस जमा करनी थी पर उन्होंने ऐसा नहीं किया।

अब दूसरी मेरिट सूची में इन खाली सीटों को जोड़कर दाखिले की मेरिट घोषित की जाएगी। इसके अलावा 20 कोर्सेज ऐसे हैं जिनमें बहुत कम आवेदन होने के कारण उनकी कटऑफ निकाली ही नहीं जाएगी। इनमें से आठ कोर्स में एक भी आवेदन नहीं आया है।
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लविवि में पीजी के ट्रेडिशनल और प्रोफेशनल, दोनों कोर्सेज की स्थिति अच्छी नहीं है। यही हाल डिग्री कॉलेजों में भी पीजी कोर्सेज का है। अगर किसी कोर्स की डिमांड है तो वह सिर्फ एमकॉम है।

एमए में तो जितने अभ्यर्थियों ने आवेदन किए, उन सभी को प्रवेश मिला फिर भी सीटें खाली पड़ी हुई हैं। एमएससी में भी सीटें भरना मुश्किल हो रहा है।

लविवि के प्रवेश समन्वयक प्रो. एनके खरे कहते हैं कि पहली कटऑफ लिस्ट में जो सीटें खाली रह गई हैं, उन्हें मेरिट नीचे गिराकर भरा जाएगा।

प्रो. खरे कहते हैं कि कुछ कोर्स ऐसे भी हैं जिसमें दाखिले के लिए काफी मारामारी है। हालांकि, कुछ कोर्सेज में आवेदन या तो आए नहीं या फिर बहुत कम आए। ऐसे में उनकी कटऑफ जारी नहीं की जाएगी।

दूसरी ओर पीजी के सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज के लिए इस बार नया नियम बनाया गया है। इसके तहत 20 सीटें या कुल सीटों की 40 प्रतिशत सीटें भरने पर कोर्स चलाने की अनुमति मिलेगी। पीजी में पांच कोर्सेज ऐसे हैं जो बॉर्डर लाइन पर हैं। ऐसे में फिलहाल कोर्स को-ऑर्डिनेटर की मांग पर इनकी मेरिट लिस्ट जारी की जा रही है।

कॉमर्स के लिए जबर्दस्त कॉम्पटीशन
शिया पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एमएस नकवी कहते हैं कि हमारे यहां एमकॉम में दाखिले के लिए जबर्दस्त काम्पटीशन है लेकिन एमए उर्दू व एमए समाजशास्त्र में आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों को दाखिला देने के बावजूद सीटें खाली हैं।

डॉ. नकवी कहते हैं कि कॉमर्स का क्रेज यूजी और पीजी दोनों में देखने को मिल रहा है लेकिन पीजी में एमए व एमएससी अभ्यर्थी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। डॉ. नकवी कहते हैं कि इस समय स्टूडेंट्स केवल रोजगारपरक कोर्सेज की ओर भाग रहे हैं।

जो स्टूडेंट्स सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं, वे ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली या किसी अन्य बड़े शहर में जाकर तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में पीजी कोर्सेज में वही स्टूडेंट आ रहे जिन्हें आगे एकेडमिक क्षेत्र में कॅरिअर बनाना है या जो अपना साल बर्बाद नहीं करना चाहते।

कालीचरण पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि एमए समाजशास्त्र में कटऑफ 44 प्रतिशत तक उतर आई। आवेदन कम आने से ऐसा हुआ। यही हाल क्रिश्चियन पीजी कॉलेज का भी है। यहां एमए इंग्लिश में अब भी दस सीटें खाली चल रही हैं।

इन कोर्सेज में एक भी आवेदन नहीं आए
पीजी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र, प्रोफिशिएंसी इन रशियन, प्रोफिशिएंसी इन उर्दू, प्रोफिशिएंसी इन संस्कृत, एडवांस डिप्लोमा इन रशियन, डिप्लोमा इन फूड प्रोडक्शन, डिप्लोमा इन मॉडर्न अरेबिक, डिप्लोमा इन रशियन।
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