लखनऊ विश्वविद्यालय की को-ऑपरेटिव लेंडिंग लाइब्रेरी में सात साल बाद
किताबें खरीदी गई हैं।
पुरानी किताबें होने के कारण स्टूडेंट्स किताबें
लेने में कम दिलचस्पी दिखाते थे लेकिन नई किताबों से छात्रों का रुझान
बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
लाइब्रेरी से किताबें देने का काम 26 अगस्त से
शुरू होगा। छात्रों को सालभर के लिए चार किताबें इश्यू की जाएंगी।
लविवि
की को-ऑपरेटिव लेंडिंग लाइब्रेरी 1967 में टैगोर लाइब्रेरी के छोटे से
कमरे में शुरू हई थी। लाइब्रेरी से पूरे साल के लिए चार किताबें मिलने की
वजह से जल्द ही इसकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई।
लाइब्रेरी में किताबें बढ़ने
पर इसे लाइब्रेरी साइंस और विज्ञान संकाय में भी चलाया गया। लोकप्रियता
बढ़ने पर 80 के दशक में इसके लिए अलग से बिल्डिंग बनाई गई। तब से यह
लाइब्रेरी निर्माण विभाग के पास स्थित बिल्डिंग में चल रही है।
लाइब्रेरी
में इस समय तकरीबन 80 हजार किताबें हैं। स्नातक और परास्नातक छात्र
लाइब्रेरी से किताबें ले सकते हैं और परीक्षा खत्म होने के सात दिनों के
भीतर छात्रों को ये किताबें लाइब्रेरी को वापस करनी होती हैं।