गुड़गांव के कालेजों में हॉस्टल न होने के कारण छात्रों को कई गुना अधिक खर्च कर पीजी में रहना पड़ रहा है। छात्रों की भीड़ को देखते हुए पीजी संचालकों ने भी किराए में बढ़ोत्तरी कर दी है। पीजी संचालक भी छात्रों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सभी संचालकों सुविधाओं के साथ साथ जगह जगह अपने पोस्टर चिपका रखे हैं।
शहर के कालेजों में झज्जर, मेवात, पानीपत, नारनौल आदि जिलों से छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। शहर के तीन कॉलेजों में करीब 18 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इनमें से करीब 5 हजार छात्र बाहर से हैं। छात्राओं के लिए कॉलेजों में गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा है, जबकि शहर के किसी भी राजकीय कॉलेज में ब्वॉयज हॉस्टल नहीं है।
राजकीय द्रोणाचार्य कॉलेज में जिले का एक मात्र ब्वॉयज हॉस्टल था, लेकिन 2013 में अभिभावकों की मांग पर इसे गर्ल्स हॉस्टल में तब्दील कर दिया गया। नतीजतन, छात्रों के लिए अब कोई भी हॉस्टल नहीं है।
पहले छात्रों को हॉस्टल में रहने के लिए सालाना छह हजार रुपये देने पड़ते थे और खाने के लिए मेस में 1500 रुपये प्रति महीने देने पड़ते थे। लेकिन अब पीजी में रहने के लिए छात्र को कम से कम 6 हजार रुपये प्रति माह देने पड़ रहे हैं। पीजी संचालकों को पहले यह किराया साढ़े चार हजार रुपये प्रति माह देना पड़ता था। अब छह हजार रुपये देना पड़ रहा है।
प्रतिक्रिया:
बिजली, पानी के खर्च बढ़ गए हैं। तीनों वक्त का खाना और साफ सफाई में अधिक खर्च हो रहा है। हर साल बीस फीसदी किराया बढ़ाकर महंगाई की पूर्ति की जाती है।
-केशव, पीजी संचालक, सेक्टर-15
बीएससी नॉन मेडिकल में दाखिला लिया। अब किराये के कमरे ढूंढने में जुटा हूं। फिलहाल दिल्ली में एक रिश्तेदार के यहां रुका हूं। जब तक रूम नहीं मिलता तब तक वहां से आना जाना करूंगा।
-सौरभ, छात्र, झज्जर
गुड़गांव में पढ़ने का शौक था, दाखिला ले लिया। लेकिन हॉस्टल नहीं है। पीजी का पता किया है, जो काफी महंगा है। छह हजार में महीना छात्र के लिए काफी होता है।
-बाल किशन, छात्र, पानीपत