जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में लिंगदोह की सिफारिशों के तहत शुक्रवार को छात्रसंघ चुनाव के लिए शांतिपूर्वक मतदान हुआ। लगभग 55 फीसदी वोटिंग हुई। यह आंकड़ा पिछले मतदान प्रतिशत के आसपास ही है।
पोलिंग बूथ के गेट शाम 5:30 के बाद बंद कर दिए गए थे, हालांकि लाइन में लगे छात्रों ने करीब सात बजे तक मतदान किया। शुक्रवार देर शाम से मतगणना भी शुरू हो गई। सेंट्रल पैनल और स्कूल कॉउंसलर्स पद के विजेताओं के नाम शनिवार देर शाम से आने की संभावना है।
तस्वीरें: चुनावी जंग में कहीं इंकलाब तो कहीं शंखनाद
चुनाव समिति के मुख्य चुनाव आयुक्त दिलीप कुमार मौर्या के मुताबिक, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (एसएसएस), स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस), स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज (एसओएल), स्कूल ऑफ साइंसेज (एसआईएस) के चार सेंटरों में 13 मतदान केंद्र बनाए गए थे। मतदान प्रतिशत का सही आंकड़ा परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन प्रारंभिक सूचना के मुताबिक लगभग 55 फीसदी वोटिंग हुई है।
आधे घंटे देरी से शुरू हुआ मतदान
कैंपस में पदाधिकारियों के नहीं पहुंचने से मतदान 9:30 बजे के बजाय 10 बजे से शुरू हुआ। हालांकि इसकी वजह से चुनाव कमेटी ने लंच टाइम को आधा घंटा कम कर दिया। वोटिंग के लिए छात्र-छात्राएं लंबी-लंबी कतारों में खड़े नजर आए। मतदान प्रक्रिया शुरू होने के पहले घंटे में कार्यकर्ता ही लाइन में नजर आए, हालांकि मतदाताओं की चहल-पहल 10:30 बजे से शुरू हुई।
ढपली और गानों से भरा जोश
आइसा, लेफ्ट प्रोग्रेसिव फ्रंट (लेफ्ट विचारधारा संगठनों का नया साझा मोर्चा) और एसएफआई ढपली की ताल पर अपने सेंट्रल पैनल के उम्मीदवारों के नाम गीतों के माध्यम से सुनाते हुए मतदाताओं से वोट मांग रहे थे, हालांकि बीच-बीच में लाल झंडे को सलाम के सुर भी सुनाई दे रहे थे। एबीवीपी और एनएसयूआई के छात्र भी गीत गाते हुए अपने पक्ष में वोट मांगते दिखे।
पहली बार हुआ टी-शर्ट अभियान
कैंपस में पहली बार डीयू की तर्ज पर छात्रों ने विशेष तौर पर अपने संगठन को दर्शाने के लिए विशेष टी-शर्ट पहनकर प्रचार किया। छात्रों का कहना था कि प्रचार में खास ढंग से मतदाताओं को जागरूक किया, ताकि वे भी बदले हुए माहौल में एजेंडों और सोच की बदलने की पहल कर सकें।
छात्र संगठनों को अपनी-अपनी जीत का दावा
आइसा, एबीवीपी, एनएसयूआई, एसएफआई, लेफ्ट प्रोग्रेसिव एलाइंस समेत आजाद प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि कमियां गिनाते हुए लेफ्ट प्रोग्रेसिव फ्रंट आइसा की जीत में सेंध लगा सकता है। वहीं, एनएसयूआई और एबीवीपी भी कैंपस में बदलाव की बात करते हुए जीत का दम भर रहे हैं।