पंजाब यूनिवर्सिटी में नया सेशन शुरू होने से पहले ही स्टूडेंट्स यूनियन के बीच टकराव ने पीयू प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हालात पर काबू पाने के लिए बुधवार को पीयू में अधिकारियों की मीटिंग हुई।
मीटिंग में डीएसडब्ल्यू प्रो. नवदीप गोयल, प्रो. नंदिता शुक्ला, डीन कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल प्रो. नवल किशोर के साथ एफिलिएटिड कॉलेजों के प्रिंसिपल भी मौजूद रहे। बैठक में फैसला लिया गया कि अगर पीयू कैंपस व कॉलेजों में छात्र संगठनों ने माहौल बिगाड़ा तो छात्र संघ चुनाव ही रद्द कर दिए जाएंगे।
बैठक में हरियाणा और पंजाब में छात्र संघ चुनाव नहीं होने का मुद्दा भी उठा। इस वजह से भी स्टूडेंट्स का रुझान पीयू और चंडीगढ़ के कॉलेजों की ओर रहता है। कॉलेज प्रिंसिपल्स ने हरियाणा और पंजाब में भी चुनाव कराने की बात उठाई और गवर्नर को चिट्ठी लिखने की मांग की।
एनएसओ का एबीवीपी में विलय
छात्र संघ चुनाव नजदीक आते है यूनिवर्सिटी में सभी छात्र संगठन सक्रिय हो गए हैं। हर कोई अपने संगठन का विस्तार करने में जुटा है। पिछले छात्र संघ चुनाव के बाद से अब तक जो संगठन गायब थे, अब वह भी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। विभिन्न मुद्दों पर धरना प्रदर्शन के साथ जोड़-तोड़ भी शुरू हो गया है।
बुधवार को नेशनल स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एनएसओ) का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) में विलय हो गया। एनएसओ के पूर्व प्रधान सुमित रूहल, जनरल सेक्रेटरी अंकुर सहरावत और प्रदेशाध्यक्ष सुमित हांडा की उपस्थिति में सभी सदस्यों ने एबीवीपी का दामन थाम लिया।
एबीवीपी के कैंपस अध्यक्ष अर्शनूर सिंह ने बताया कि एनएसओ के एबीवीपी में शामिल होने से संगठन को मजबूती मिलेगी। एनएसओ से आए छात्र नेताओं को बराबर का सम्मान मिलेगा। अर्शनूर ने दावा किया कि छात्र संघ चुनाव जीतने के बाद एबीवीपी सबसे बड़े संगठन के रूप में उभरेगी।