प्रदेश भर के हजारों छात्र गोल्डन चांस के इंतजार में हैं। यूजी के पुराने ईयर सिस्टम में द्वितीय वर्ष में फेल और अंतिम चांस में भी कंपार्टमेंट परीक्षा पास न करने पाने वाले छात्रों को विवि से राहत की उम्मीद है।
कंपार्टमेंट परीक्षाएं 25 सितंबर से शुरू होंगी, मगर विवि ने ऐसे छात्रों को राहत देने के लिए अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। मामले पर विवि प्रशासन अभी तक फैसला लेने के बजाय विचार ही कर रहा है।
जुलाई 2013 में एचपीयू ने स्नातक कक्षाओं में रूसा सेमेस्टर सिस्टम लागू किया था। दो विषयों में सेकंड ईयर में फेल छात्रों को परीक्षा देने का मौका दिया था। प्रथम वर्ष में फेल छात्रों के लिए अलग से पुराने सिस्टम में मार्च में परीक्षा ली थी।
नए और पुराने सिस्टम के चक्कर में प्रदेश के हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका है। छात्र संगठनों ने भी विवि से द्वितीय वर्ष में दो विषयों में फेल और कंपार्टमेंट परीक्षा पास न कर पाने वाले छात्रों के लिए गोल्डन चांस की मांग की थी। विवि ने छात्रों को राहत देने की बात कही थी। यूजी की कंपार्टमेंट परीक्षाएं 25 सितंबर से शुरू होंगी।
तो अलग से करवानी पड़ेगी व्यवस्था
विश्वविद्यालय प्रशासन अब चांस देता भी है तो छात्रों के पास परीक्षा फार्म भरने और परीक्षा में बैठने के लिए समय ही नहीं बचा है। ऐसे में विवि अब क्या फैसला लेगा, इसका प्रदेश के हजारों छात्र इंतजार कर रहे हैं।
आम तौर पर गोल्डन चांस की परीक्षा अनुपूरक परीक्षाओं के साथ होती रही है। अब यदि चांस मिलता है तो इसके लिए विवि को अलग से परीक्षा करवाने की व्यवस्था करवानी पड़ सकती है।
विचाराधीन है मामला: परीक्षा नियंत्रक
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्यामलाल कौशल ने बताया कि गोल्डन चांस का मामला विचाराधीन है। उम्मीद है कि द्वितीय वर्ष में फेल और अंतिम चांस में भी कंपार्टमेंट परीक्षा पास न कर पाने वाले छात्रों को राहत देने के लिए विवि प्रशासन जल्द कोई फैसला लेगा। प्रशासन के आदेशों के मुताबिक परीक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
विवि से दो बार उठाया है मामला
एसएफआई के राज्य सह सचिव पुनीत धांटा और एबीवीपी के राज्य सह मंत्री नवनीत कौशल का कहना है कि कई बार मामला विवि प्रशासन के समक्ष उठाया गया है, ताकि छात्रों का भविष्य दांव पर न लगे। अभी तक गोल्डन चांस देने पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। विवि प्रशासन इस पर जल्द फैसला ले।