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छात्रों को शोध के लिए भी मिलेगी छात्रवृत्ति

Wed, 09 Dec 2015 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश के छात्र भी अब राष्ट्रमंडल विश्वविद्यालय संघ (एसीयू) की ओर से चलाई जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। छात्रवृत्ति के लिए तय मानकों को पूरा करने वाले प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र विदेशों में जाकर शोध कार्य कर सकेंगे। राष्ट्रमंडल विश्वविद्यालय संघ (एससीयू) की यूके में हुई जनर काउंसिल और ट्रस्टी बैठक में भाग लेने गए एचपीयू के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि इससे एक ओर जहां विश्वविद्यालय के शोध और मेधावी छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे शोध कार्यों की समझ बढ़ेगी। साथ ही वे अपनी प्रतिभा का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन भी कर सकेंगे। एसीयू वर्तमान में कामन वेल्थ छात्रवृत्ति और शिवनिंग छात्रवृत्ति देता है। इसका लाभ अब हिमाचल के छात्र भी उठा सकेंगे। उन्होंने बताया कि संघ में शामिल 13 देशों के विश्वविद्यालयों के सदस्य कुलपति और ट्रस्टी शामिल हुए।

इनमें बंगलादेश, श्रीलंका की जाफना, कनाडा, आस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों से आए कुलपतियों ने एचपीयू के साथ शिक्षा, शोध और छात्रों का आदान-प्रदान करने में इच्छा व्यक्त की है। इस पर लंबी चरचा भी हुई। प्रो. वाजपेयी ने कहा कि बाथ इस्पा जैसे विश्वविद्यालयों के साथ ही पहले ही हमारी बात चल रही है।
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इन विश्वविद्यालयों के साथ साझा शोध, शिक्षा जैसे कार्यक्रमों पर समझौता हो जाने पर यहां के छात्र इन विदेशी विश्वविद्यालयों में शोध करने जा सकेंगे, वहीं वहां के छात्र एचपीयू में पढ़ाई करने आ सकेंगे। कुलपति ने दौरे के दौरान भारतीय मूल के ट्रीनिटी कॉलेज और कैंब्रेज यूनिवर्सिटी लंदन में पढ़ रहे छात्रों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि आत्मिक अनुसरण में देशज ज्ञान को आपस में जोड़ा जाना चाहिए। राष्ट्र मंडल विश्वविद्यालय संघ देशों के विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों को आत्मिक अनुसरण में देशज ज्ञान को जोड़कर अध्ययन करना चाहिए। प्रो वाजपेयी ने कहा कि भारत इस समय विश्व गुरु के रूप में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

जहां युवा शक्ति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, देशज ज्ञान और उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं उपलब्ध हैं। आत्मिक अनुसरण में देशज ज्ञान जोड़ कर शिक्षा ग्रहण करने से समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रचार व प्रसार होगा, वहीं शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन आएगा, इसके अलावा वैश्विक स्तर पर उच्चतर शिक्षा में भी एकरूपता आएगी।

उन्होंने कहा कि बेहतर गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर गहरी, आज्ञाकारी और ईमानदार पहल होनी चाहिए तथा उच्चतर शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने के लिए निचले स्तर पर पर्यास होने चाहिए।
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