ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में ऐसे स्टूडेंट, जो स्ट्रीम चेंज करना चाहते हैं या फिर उन्होंने मदरसे से पढ़ाई की है तो उन्हें आगे बीकॉम, बीसीए और बीएससी की डिग्री हासिल करने में अब दिक्कत नहीं होगी।
नए शैक्षिक सत्र 2014-15 से यूनिवर्सिटी में एक वर्षीय ब्रिज कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इसे पढ़ने के बाद स्टूडेंट कॉमर्स व साइंस में बैचलर डिग्री पाने के लिए पात्र हो जाएगा।
अगर स्टूडेंट चाहे तो वह इंटरमीडिएट के बाद सीधे चार साल के इंटीग्रेटेड कोर्स में दाखिला लेकर स्नातक की उपाधि हासिल कर सकता है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्टूडेंट्स की सहूलियत के लिए ब्रिज कोर्स शुरू करने का फैसला लिया है।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अनीस अंसारी का कहना है कि जुलाई 2014 से कॉमर्स व साइंस विषयों में ब्रिज कोर्स शुरू किए जाएंगे।
एक वर्षीय ब्रिज कोर्स के रूप में बैचलर ऑफ कॉमर्स, बैचलर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन और बैचलर ऑफ होम साइंस शुरू किए जाएंगे। बैचलर ऑफ कॉमर्स और बैचलर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स को मैथ्स, कॉमर्स, इकोनॉमिक्स और कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई कराई जाएगी।
वहीं, बैचलर ऑफ होम साइंस में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स को फिजिक्स, केमेस्ट्री, बॉयोलॉजी और मैथ्स पढ़ाया जाएगा। अगर स्टूडेंट चाहें तो वे इन्हें एक साल के ब्रिज कोर्स के रूप में पढ़ें या फिर चार साल के इंटीग्रेटेड कोर्स के रूप में पढ़ाई कर बीकॉम, बीसीए और बीएससी की डिग्री हासिल कर सकता है।
इसे इंटरमीडिएट में आर्ट्स स्ट्रीम के स्टूडेंट और मदरसा बोर्ड से पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को कहीं दिक्कत नहीं होगी। उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सैय्यद हैदर का कहना है कि यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए पांच मई से फॉर्म जारी किए जाएंगे।
अभी ब्रिज कोर्स की फीस तय करने का काम किया जा रहा है। जल्द ही स्टूडेंट्स को इसकी जानकारी दे दी जाएगी। बाकी जो फॉर्म जारी हो रहे हैं, उनमें रेग्युलर व प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन 500 रुपये का मिलेगा।
वोकेशनल कोर्स में दाखिले के लिए फॉर्म 100 रुपये का दिया जाएगा। फिलहाल, ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स की संख्या को बढ़ाने के लिए इस बार काफी मेहनत की जा रही है।