पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) एफिलिएटेड कालेज में सीईटी (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) के तहत पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में होने वाले सभी दाखिले सेंट्रलाइज्ड करने की तैयारी में है।
पीयू एफिलिएटेड कालेजों में बड़े स्तर पर पीजी कोर्स दाखिले में गड़बड़ी के मामले आमने आ रहे हैं। कालेज प्रबंधन पहले अयोग्य कैंडीडेट को दाखिला दे देते हैं और फिर सिंडीकेट से उसे अप्रूव कराने की गुहार लगाते हैं। पीयू की 26 अप्रैल को हुई सिंडीकेट बैठक में कुछ ऐसे ही मामले सामने आए हैं।
अयोग्य कैंडिडेट को दाखिले
पीजी कोर्स में दाखिले के मामले की जांच कर रहे बोर्ड ने भविष्य में सीईटी के तहत सभी पीजी कोर्स में दाखिला सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम से कर ऐसे मामलों को रोका जा सकेगा। गौरतलब है कि पीयू पिछले कई सालों से बीकॉम, लॉ और कुछ अन्य प्रोफेशनल कोर्स के लिए सेंट्रलाइज्ड एडमिशन प्रक्रिया अपना रहा है। इसमें गलत दाखिले के चांस नहीं के बराबर रह जाते हैं।
केस नंबर-1
जीसी-11 केमिस्ट्री विभाग में एमएससी प्रथम वर्ष में छात्रा नवदीप कौर को दाखिला दे दिया गया। दाखिले संबंधी छात्रा के प्रमाण पत्र जब पीयू की आर एंड एस ब्रांच के पास पहुंचे तो छात्रा को कोर्स में दाखिले के अयोग्य करार दिया गया।
छात्रा ने पंजाब यूनिवर्सिटी पटियाला से बीएससी बायोटेक्नोलॉजी से ग्रेजुएशन की डिग्री की थी। पीयू नियमों के तहत नवदीप कौर को एमएससी केमिस्ट्री में दाखिला नहीं मिल सकता था।
कालेज दाखिला कमेटी इंचार्ज से इस मामले में जवाब-तलब किया गया। छात्रा के भविष्य का हवाला देते हुए केमिस्ट्री बोर्ड ऑफ स्टडीज के पास मामला भेजा गया। कमेटी ने सिंडीकेट से छात्रा के दाखिले को स्पेशल केस मानते हुए अप्रूव करने की मांग की है।
केस-2
सेक्टर-26 स्थित गुरु गोबिंद सिंह कालेज ने 2013 सत्र में नेहा पोडार को एमएससी (माइक्रोबायल बायोटेक्नोलॉजी) में दाखिला दे दिया। छात्रा ने ओसीईटी टेस्ट में 42वां रैंक हासिल किया था। लेकिन छात्रा कोर्स में दाखिले के अयोग्य थी। कालेज प्रबंधन को पीयू ने 9-1-14 को छात्रा का रिकार्ड देखकर इस मामले को लेकर जानकारी दे दी। मामले को लेकर एडवाइजरी कमेटी ने छात्रा के दाखिले को योग्य मानने का प्रस्ताव पीयू सिंडीकेट के पास भेजा है।