इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राज्य
प्रवेश परीक्षा (एसईई) 2013 में हर कदम पर ढिलाई बरती गई। व्यवस्था
फूलप्रूफ नहीं थी जिसकी वजह से परीक्षा में सॉल्वर गैंग सक्रिय रहा और जमकर
फर्जीवाड़ा हुआ।
गौतमबुद्ध प्राविधिक
विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) की ओर से बनाई गई जांच कमेटी के अध्यक्ष प्रो.
दुर्ग सिंह चौहान की जांच में ये बात पता चली है। प्रो. चौहान ने दो दिन
मामले की विस्तृत जांच की।
उन्होंने पूरी कमेटी के सामने अलग-अलग बयान दर्ज
किए और मामले से जुड़े तथ्यों को उनके सामने रखा। फिलहाल जिन छात्रों ने
इस मामले में शिक्षकों के नाम लिए थे, उनका बरी होना तय माना जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो उनकी भूमिका के बारे में कोई ठोस सुबूत नहीं मिले हैं।
एसईई में गड़बड़ी इसलिए हुई क्योंकि पूरी
व्यवस्था ही गड़बड़ थी। 21 अप्रैल को आजाद इंजीनियरिंग कॉलेज में अभ्यर्थी
तेजपाल गंगवार की जगह परीक्षा दे रहे इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड
टेक्नोलॉजी (आईईटी) के बीटेक सेकंड ईयर के छात्र प्रकाश पांवरिया और बीटेक
अंतिम वर्ष के छात्र खुशहाल बाबू को रंगे हाथ पकड़ा गया था।
उन्होंने आईईटी
के स्टूडेंट व सॉल्वर गैंग के सरगना फिरोज बेग व अनुज रावत के नाम लिए थे।
इसके बाद हॉस्टल में छापा मारा गया और वहां काफी सामग्री मिली थी।
हालांकि,
उन सामग्रियों का विस्तृत लेखा-जोखा नहीं रखा गया और ये तय नहीं हो पाया
कि कमरे में क्या-क्या था।
जांच कमेटी ने पूछताछ में पाया कि पूरा मामला
कंफ्यूजन की वजह से और बड़ा हो गया क्योंकि यहां पर परीक्षा के संचालन की
जिम्मेदारी निभाने वाले प्रोफेसर व शिक्षकों ने जीबीटीयू प्रशासन के साथ
ढंग से तारतम्य नहीं बैठाया।
जांच कमेटी के सामने बयान देने आए शिक्षकों
में भी कन्फ्यूजन ही देखने को मिला। कमेटी
ने अपना काम लगभग पूरा कर लिया है और मामले की रिपोर्ट देने की तैयारी है।
इधर, सॉल्वर गैंग का खुलासा होने के बाद शिक्षकों की भूमिका सामने आने पर
पुलिस की ओर से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कमेटी के सामने पुख्ता
तथ्य न होने पर इन्हें क्लीनचिट मिलना भी तय माना जा रहा है।